मुख्य कहानी

दक्षिण एशिया के लिए नए उपाध्यक्ष की भारत यात्रा

17 सितम्बर, 2013


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क्षेत्र के पहले भ्रमण के दौरान दक्षिण एशिया क्षेत्र के उपाध्यक्ष फिलिप ली होउएरोउ वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान से भारत आए तो अमृतसर के महापौर और अन्य सरकारी अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

मर्जे वैन देर हैड / विश्व बैंक


अगस्त के आखिर में हल्की बारिश हो रही थी तो उस दौरान फिलिप ली होउएरोउ ने पाकिस्तान से वाघा सीमा चौकी के रास्ते भारत में प्रवेश किया। दक्षिण एशिया क्षेत्र ( एसएआर) के लिए नवनियुक्त उपाध्यक्ष (वीपी) ली होउएरोउ ने क्षेत्र के अपने पहले भ्रमण के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच की यात्रा के वास्ते अपारंपरिक रास्ता चुना। उन्होंने जब भारत में कदम रखे तो उनके साथ निवर्तमान उपाध्यक्ष इसाबेल गुएर्रो भी थीं। ली होउएरोउ का भारतीय  सेना ने अभिवादन किया और सरकारी अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर अनेक कैमरामैन भी उपस्थित थे। वाघा से आते समय ली होउएरोउ को दुनिया के कम संबद्व क्षेत्रों में से एक का दुर्लभ सीमा का दृश्य देखने को मिला। उन्होंने पाकिस्तान में प्रवेश की प्रतीक्षा में पंक्ति लगाऐ खड़े ट्रक देखे जिनमें प्याज और कपास लदी थी। यह दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा व्यापार का बहुत सीमित हिस्सा है।

ली होउएरोउ, जो अभी हाल तक यूरोप और सेंट्रल एशिया के लिए विश्व बैंक के उपाध्यक्ष रहे हैं, ने कहा “मैं यह जानकर आश्चर्यचकित रह गया कि दक्षिण एशिया में अंतर-क्षेत्रीय व्यापार कुल व्यापार का केवल 5 % ही है तथा सीमा व्यापार की लागत दुनिया में सबसे अधिक लागत में शामिल है। साझा सीमाओं से साझी समृद्धि प्राप्त हो सकती है तथा बैंक में हम अधिक व्यापार और संसाधन सहयोग के लिए उनके अवसर बढ़ाने में दक्षिण एशियाई देशों की सहायता के लिए इच्छुक हैं”।

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बाद में शाम को ली होउएरोउ ने सिख समुदाय के सबसे पवित्र भव्य स्वर्ण मंदिर के दर्शन किए। गोधूलि बेला मे जगमगाते स्वर्ण मंदिर में स्थानिक ग्रंथि ने ली होउएरोउ को गुरुद्वारे का भ्रमण कराया। जैसा कि सिख मंदिर गुरुद्वारे कहलाते हैं जिसके दर्शन प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु  करने आते हैं। ली होउएरोउ मंदिर के परिसर में लंगर के संचालन से बहुत प्रभावित हुए जहां रोजाना औसतन 80‚000 लोगों को खाना खिलाया जाता है।

अगले दिन सुबह, ली होउएरोउ अमृतसर जिले में ग्रामीण समुदायों को देखने गए जो विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से पंजाब ग्रामीण जल आपूर्ति एवं स्वच्छता परियोजना (पंजाब आर डब्ल्यू एस एस) के आधीन अपने मीटर से पानी आपूर्ति की योजना चला रहे हैं। हालांकि पंजाब भारत के सर्वाधिक सम्पन्न राज्यों में एक है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों को जल की घटती गुणवत्ता और स्वच्छ पीने के पानी की घरों तक पहुंच के अभाव जैसी दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ता है। पंजाब आरडब्ल्यूएसएस परियोजना 840 गांवों तक स्वच्छ पीने का पानी लाने में सहायता कर रही है तथा 18 गांवों को निर्बाध 24 घंटे पीने का पानी मिलने लगा है।

ली होउएरोउ उत्तर प्रदेश भी गए जो भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है तथा सबसे अधिक गरीब राज्यों में एक है। भारत के लिए विश्व बैंक की नई देश भागीदारी रणनीति (2013-17) में उत्तर प्रदेश जैसे कम आय वाले राज्यों में अधिक व्यापक कार्यक्रम पर बल दिया गया है जो निरंतर असीम विकास चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

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ली होउएरोउ आगरा जिले में आरम्भिक शिशु देखरेख केंद्र (अर्ली चाइल्डहुड केयर सेंटर) में प्री-स्कूल बच्चों के समूह से मिले। उन्होंने बच्चों और उनकी देखरेख करने वालों से बात की ताकि देश की उच्च स्तर कुपोषण से निपटने के प्रयासों में चलाए जा रहे पोषण और शैक्षिक कार्यक्रमों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त की जा सके। देश में उच्च स्तर के कुपोषण से आने वाली पीढ़ियों की पूर्ण उत्पादक क्षमता अवरुद्ध रहती है। ली होउएरोउ इसके बाद नजदीकी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय गए जो गरीब परिवारों की लड़कियों के लिए आवासीय स्कूल है और प्रायः उन परिवारों की लड़कियों की पहली पीढ़ी को शिक्षा उपलब्ध कराता है। विश्व बैंक सभी बच्चों, विशेषकर स्कूली शिक्षा से वंचित पृष्ठभूमि की लड़कियों और बच्चों को शिक्षा देने के भारत सरकार के प्रयासों का समर्थन कर रहा है।  स्कूली शिक्षा से अछूते 2 करोड़ से अधिक बच्चों को सरकार के प्रमुख कार्यक्रम सर्व शिक्षा अभियान (सबके लिए शिक्षा) से जोड़ा जा चुका है तथा अब यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है कि बच्चे स्कूल न छोड़ें और माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने का लाभ उठाएं। 


" अपने क्षेत्र के दौरे में सबसे पहले मैंने देखा कि प्रतिबद्ध दल शानदार परिणाम हासिल करने के लिए कितने टिकाऊ प्रयास कर सकता है। लड़कियों के लिए अवासीय विद्यालय के मामले में यह सच है, क्योंकि यह अद्भुत लवणीय भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने जैसा है। हम गरीब समुदायों की लड़कियों को स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने के द्वारा गरीबी से लड़ें या गरीब किसानों की भूमि की उर्वरता वापस लाने का काम करें, अंत में यह सब उन लोगों पर है जो यह काम करते हैं।  "

फिलिप ली होउएरोउ

उपाध्यक्ष, दक्षिण एशिया क्षेत्र, विश्व बैंक

मानसून की बारिश का साहस के साथ सामना करते हुए, उपाध्यक्ष ने लाखनवाला और हुरसैना गांव में किसानों से भी मुलाकात की जिन्होंने अपनी बंजर भूमि को फिर से उपजाऊ बनाने के लिए विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से लवणीय भूमि उर्वरता बहाल करने की परियोजना के अन्तर्गत उपलब्ध प्रौद्योगिकी का उपयोग किया है। किसानों ने उन्हें बताया कि उनके खेत फिर से उपजाऊ होने के बाद कैसे उनका जीवन बदल गया है। उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के अन्तर्गत 2,60,000 हेक्टेयर से अधिक लवणीय भूमि फिर से उपजाऊ बनाई गई जिससे 4,25,000 से अधिक गरीब परिवारों को अपनी आमदनी में महत्वपूर्ण वृद्धि करने में सहायता मिली है। 

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क्षेत्र में अनेक घंटे बिताने के बाद, उपाध्यक्ष को प्रारंभिक 16वीं सदी की मुगल राजधानी पुराने आगरा में विरासत स्थलों की सैर कराई गई जहाँ आज भी आधुनिक शहरी भारत और पुराने मकानों, मस्जिदों और मंदिरों के बीच ऐतिहासिक संघर्ष देखा जा सकता है। अनेक शहरी गरीबों के साथ इस क्षेत्र में यह सब अनौपचारिक रूप से बसे हैं। विरासत की सैर दुनिया के महानतम स्थल ताजमहल पर समाप्त हुई जहां मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम के प्यार की याद में संगमरमर का मकबरा बनवाया। भव्य गुम्बद और खूबसूरत बागों से प्रभावित ली होउरेओउ ने कहा, “यह साफ तौर पर उन अति सुन्दर स्मारकों में से एक है जो मैंने देखे हैं। मैं उस समर्पण और कलाकारी को देखकर बहुत प्रभावित हूं जो इस इमारत में की गई है जो दुनिया की सबसे सुन्दर संरचनाओं में से एक है।”

वे यमुना नदी के किनारे पर बना ऐतिहासिक आगरा किला देखने भी गए जो देश के इतिहास के सर्वाधिक रंगीन काल में से एक की बहादुरी, सम्मान और विश्वासघात की कहानियों से परिपूर्ण है। हमेशा की तरह, अतीत से जकड़ी रहने के साथ आधुनिक भारत की चुनौतियां आती रही हैं क्योंकि देश के तेजी से हो रहे शहरीकरण को अपनी एक अरब से अधिक जनसंख्या की बढ़ती आकांक्षाएं पूरी करनी हैं।

“पंजाब और उत्तर प्रदेश के गांवों को देखने से मुझे भारत के विकास में मौजूद खाई का पता चला। भारत की चुनौतियों का स्तर असीम है तथा नूतन विकास के फलस्वरूप दुनिया भर के देशों के लिए अनेक मूल्यवान सबक मिले हैं।”

दिल्ली में ली होउरेओउ ने विभिन्न स्तरों पर सरकारी अधिकारियों से भेंट की और इस बात पर चर्चा की कि भारत में विश्व बैंक की आर्थिक सहायता से चलाई जा रही परियोजनाओं की गति में सुधार कैसे किया जा सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन लोगों के लिए यह परियोजनाएं डिज़ाइन की गई हैं उन्हें इनके जल्दी और बेहतर परिणाम मिल सकें।


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