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मुख्य कहानी 31 मार्च, 2019

भारत में ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए उम्मीद की नई किरण

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एक करोड़ रुपये का प्रभावी निवेश संभावित रूप से 100 महिला उद्यमियों को सहारा दे सकता है, जो इसके आगे कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सेवाओं, विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में 300 से 400 और गरीबों को रोजगार प्रदान कर सकता है।


विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन के समर्थन से लॉन्च किया गया महिलाओं के लिए एक नया सामाजिक प्रभाव बांड, जिसे महिलाओं की आजीविका बांड कहा जाता है, भारत में पहला प्रभाव बांड है जो प्रभाव निवेशकों को ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमियों के साथ जोड़ेगा।

बिहार के पटना में कुछ साल पहले तक सुधा देवी का परिवार एक मिठाई की दुकान पर उनके पति की प्रशिक्षु की नौकरी पर निर्भर था। ढाई हज़ार रुपये से 20,000 रुपये तक के लघु वृद्धिशील ऋणों से सुधा और उनके पति सखिंदर ने एक सफल स्थानीय व्यवसाय खड़ा किया। आज, उस व्यवसाय का वार्षिक राजस्व 40 लाख रुपये से अधिक है।

महाराष्ट्र के परडी की गृहिणी, अर्चना अमरदीप भोइर ने 2017 में सब्जी की खेती, कटलरी की दुकान और जेरोक्स सेंटर के लिए 84,000 रुपये का ऋण लेकर अपना उद्यम शुरू किया।

निःसंदेह ये भारत में महिला उद्यमियों की उत्साहवर्धक कहानियां हैं। हालांकि, जहां महिला समूह बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों से उधार ले सकते हैं, वहीं देश में व्यक्तिगत महिला उद्यमियों को अपने उद्यमों के वित्तपोषण के लिए धन जुटाते समय कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पचास हज़ार रुपये से 5 लाख रुपये तक के ऋण को अक्सर बहुत छोटा और बहुत जोखिम भरा माना जाता है और उन पर 20 से 24 प्रतिशत का ब्याज लगाया जाता है।

नई ऊंचाइयां

एक नया सामाजिक प्रभाव बांड, जिसे महिलाओं का आजीविका बांड कहा जाता है, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन के समर्थन द्वारा महिलाओं के लिए शुरू किया गया है. यह भारत में पहला प्रभाव बांड है जो सुधा देवी और अर्चना जैसी पिरामिड के निचले स्तर पर खड़ी महिला उद्यमियों के साथ प्रभाव निवेशकों को जोड़ देगा।

मुंबई में 19 फरवरी year को बांड की के उद्घाटन में भाग लेते हुए, सुधा देवी और अर्चना अपने कारोबार को और भी अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आशान्वित थीं।

तीस से चालीस स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार देने वाले उद्यम के लिए अपने सपनों के बारे में बात करते हुए सुधा देवी ने कहा, "कभी-कभी हमारा नकदी प्रवाह सूख जाता है और हम काम बंद करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। लेकिन हम आशा करते हैं कि यदि हम निवेश का अधिक सुसंगत प्रवाह प्राप्त कर सके तो हम नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे। यही मेरा सपना और मेरा लक्ष्य है।"

अधिकांश कर्ज (क्रेडिट) बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में महिलाओं को प्राप्त होने की उम्मीद है।

व्यक्तिगत महिला उद्यमियों की मदद करना

लगभग दस प्रमुख संपत्ति प्रबंधकों और कॉरपोरेट्स द्वारा समर्थित बांड, भारत के कुछ सबसे गरीब राज्यों में ग्रामीण महिलाओं को अपने स्वयं के उद्यम स्थापित करने या बढ़ाने में मदद करेगा। इनसे 1 लाख रुपये से 1.5 लाख रुपये तक का कर्ज मिलने की उम्मीद है जिन पर लगभग 13 से 14 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दरें होंगी। इससे इस प्रक्रिया में लाखों नौकरियां पैदा होने की संभावना है। एक करोड़ रुपये का प्रभावी निवेश संभावित रूप से 100 महिला उद्यमियों की मदद कर सकता है, जो इसके आगे कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, सेवाओं, विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में 300 से 400 और गरीबों को रोजगार प्रदान कर सकता है।

मुंबई में 19 फरवरी 2019 को बांड की लांच के दौरान विश्व बैंक के कंट्री निदेशक जुनैद अहमद ने कहा कि “महिलाओं और बच्चों में निवेश करना राष्ट्र के विकास में निवेश करना है। पिछले कई वर्षों में, यह मानव पूंजी में सबसे बड़े निवेश के रूप में उभरा है।”

निजी क्षेत्र की भागीदारी

सेंट्रम, एएसके, एंबिट, आदित्य बिरला कैपिटल जैसी कुछ बड़ी संपत्ति प्रबंधन एजेंसियों ने फंड जुटाने के लिए उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्तियों और प्रभाव निवशकों तक पहुंच बनाई है। टाटा कम्युनिकेशंस, केमिकल्स, ट्रेंट और वोल्टास जैसी कंपनियों ने भी निवेश में दिलचस्पी दिखाई है।

उम्मीद है कि आगामी महीनों में कई चरणों के जरिए 300 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे, जिससे माइक्रोफाइनेंस संस्थानों और स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों को लघुवित्त एवं आजीविका कार्यक्रमों से बाजार द्वारा वित्तपोषित कार्यक्रमों में बदलने में मदद मिलेगी। महत्वपूर्ण रूप से, यह उन्हें समूह ऋण से व्यक्तिगत उद्यमिता की ओर बढ़ने में सहायता करेगा।

महिलाओं के आजीविका बांड को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व योगदान और अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग (डीएफआईडी) की अनुदान सहायता के जरिए बनाए जाने वाले एक कॉर्पस फंड द्वारा समर्थित किया जाएगा, जो प्रथम हानि डिफ़ॉल्ट गारंटी के रूप में कार्य करेगा, साथ ही कार्यक्रम के परिणामों की निगरानी और ट्रैकिंग में मदद करेगा।

सिडबी महिला उद्यमी प्रतिभागियों के लिए उद्यमिता प्रशिक्षण और आंशिक क्रेडिट गारंटी के रूप में समर्थन का एक पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराएगा।

विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन व्यापार क्षेत्र सलाहकार परिषद प्रभाव निवेशकों तक पहुंचने में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) का समर्थन करेंगे और प्रभाव को प्राप्त करने एवं ट्रैक करने में मदद करेंगे।

श्री अहमद ने कहा कि "भारत में हम जिन सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उनमें से एक है श्रम शक्ति में महिलाओं की गिरती भागीदारी।"  उन्होंने कहा कि "हमें लगता है कि निजी बाजार वित्त को इस प्रक्रिया में शामिल करके और यह सुनिश्चित करके कि यह व्यक्तिगत महिला उद्यमिता तक पहुंचता है, हम इस गिरावट को उलटने में सक्षम हो सकते हैं।"


"महिलाओं और बच्चों में निवेश करना राष्ट्र के विकास में निवेश करना है। पिछले कई वर्षों में, यह मानव पूंजी में सबसे बड़े निवेश के रूप में उभरा है |"
जुनैद कमाल अहमद
कंट्री निदेशक, भारत


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