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प्रेस विज्ञप्ति

विश्व बैंक भारत के निम्न-आय वाले राज्यों की सहायता में वृद्धि करेगा – विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष किम का कथन

13 मार्च, 2013



विश्व बैंक ग्रुप भारत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्त और ज्ञान (नॉलेज) उपलब्ध कराने को वचनबद्ध

नई दिल्ली, 13 मार्च, 2013– विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष जिम योंग किम ने कहा है कि विश्व बैंक ग्रुप भारत को वित्तीय और ज्ञान-संबंधी (नॉलेज) सेवाएं सुलभ कराकर तथा निम्न-आय वाले राज्यों की सहायता में वृद्धि करने के सरकार के अनुरोध पर समुचित प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएं पूरी करने में भारत की मदद करने को वचनबद्ध है। भारत के अधिकांश ग़रीब इन्हीं राज्यों में रहते हैं।  

विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष की हैसियत से भारत की अपनी पहली यात्रा पूरी करते हुए विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष किम ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम् और उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव समेत भारत के अन्य नेताओं के साथ देश के विकास से संबंधित- प्राथमिकताओं पर उनका विचार-विमर्श फलप्रद रहा है।

किम ने कहा, मैं भारत से रवाना होते समय विकास-संबंधी उन उल्लेखनीय उपलब्धियों की भारी प्रशंसा करता हूं, जो देश ने हाल के दशकों में अर्जित की हैं। भारत के अनुभवों से विश्व बैंक ग्रुप और विश्व के अनेक देशों को बहुमूल्य शिक्षा मिलेगी।” “ हमारे सामने भारत में तेज़ी से ग़रीबी दूर करने का ऐतिहासिक अवसर मौजूद है। विश्व बैंक ग्रुप यह महत्तवपूर्ण लक्ष्य प्राप्त करने में लगी भारत की जनता की सहायता करने के लिए वचनबद्ध है।”

 दिल्ली में नागरिक समाज के नेताओं,  निजी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों और एक युवा समूह के साथ बैठकों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के अपने दौरे से किम को उन चुनौतियों को अधिक विस्तार से समझने में मदद मिली है, जिनका भारत को अपनी और अधिक चहुंमुखी आर्थिक संवृद्धि के मार्ग पर सामना करना पड़ रहा है।

किम ने कहा कि विश्व बैंक ग्रुप भारत को प्रति वर्ष 3 से 5 अरब डॉलर तक की सहायता देने के अपने स्तर को अगले चार वर्षों के दौरान जारी रखेगा। विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में सुधार करने में भारत की मदद करने के लिए बैंक इसे संवर्धित वित्तीय लेंडिंग के साथ-साथ तकनीकी सहायता तथा ज्ञान-संबंधी सेवाएं भी सुलभ कराएगा।

किम ने कहा, भूमंडल पर ग़रीबी दूर करने के विश्व बैंक समूह के मिशन को पूरा करने के लिए हमें भारत के निर्धनतम नागरिकों के लिए सहायता बढ़ाने की ज़रूरत पड़ेगी।” “ भारत के सबसे ज़्यादा ग़रीब सात राज्यों में 20 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जो अभी तक शिक्षा, स्वास्थ्य-संबंधी देखभाल तथा ऐसी अन्य बुनियादी सेवाओं से वंचित हैं, जिन्हें पाने के वे अधिकारी हैं। इन क्षेत्रों पर ध्यान देने से भारत को अपनी समस्त जनता के लिए भागीदारी पर आधारित संवृद्धि अर्जित करने में मदद मिलेगी।”

उत्तर प्रदेश में किम एक ग्रामीण समुदाय देखने गए, जहां उन्होंने उन प्रत्यक्ष चुनौतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की, जो भारत के तेज़ी से होने वाले शहरीकरण की वजह से पैदा हुई हैं, जहां प्रति वर्ष एक करोड़ लोग ग्रामीण इलाकों को छोड़कर कस्बों और शहरों को जा रहे हैं। किम ने कहा, भारत के ग्रामीण इलाकों में अवसरों की कमी लोगों को प्रायः शहरों के बेहतर जीवन के प्रति आकर्षित होने के लिए विवश करती है। बड़ी संख्या में भारत के शहरी इलाकों को जाने वाले व्यक्तियों की ऊर्जा और उद्यमशीलता से भारत को अपनी आर्थिक संभावनाओं को विस्तृत करने में मदद मिल सकती है, लेकिन नगरों के उन्हें रोज़गार और बुनियादी सेवाएं सुलभ कराने में सक्षम होने पर ही ऐसा संभव हो सकता है।

किम ने उन चुनौतियों को अच्छी तरह समझने के लिए उत्तर प्रदेश के एक महानगर कानपुर का दौरा भी किया, जिनका बढ़ते हुए शहरों के प्रबंधन के दौरान भारत को सामना करना पड़ रहा है। किम ने कहा, मैं भारत के नगरपालिका-प्रशासकों के प्रति आदर-भाव के साथ कानपुर से लौट रहा हूं, जो गांवों से शहरों में पहुंचने वाले लाखों-करोड़ों नागरिकों को रोज़गार, मकान, बिजली, पानी तथा अन्य बहुतेरी बुनियादी सेवाएं सुलभ कराने के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं।”  विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष ने कम आय वाले राज्यों की सहायता में वृद्धि करने की भारत सरकार की नीति पर भी संतोष व्यक्त किया, जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। 

आगे चलकर विश्व बैंक ग्रुप शहरों में संसाधन-संपन्न अवसंरचना के निर्माण तथा पर्यावरण के अनुकूल विकास और अधिकारियों की मदद करते हुए शहरीकरण की मौजूदा प्रक्रिया के और अधिक कारगर ढंग से प्रबंधन की दिशा में भारत के प्रयासों को भी समर्थन देगा। 

भारत विश्व बैंक ग्रुप का सबसे बड़ा ग्राहक है। 2009-2013 के बीच विश्व बैंक ग्रुप ने भारत को लगभग 26 अरब डॉलर का ऋण प्रदान किया। इसमें 2009-10 में दी गई 11 अरब डॉलर की वह धनराशि भी शामिल है (एक वर्ष के भीतर दी जाने वाली सबसे अधिक धनराशि), जो विश्व बैंक ने 2008 के वित्तीय संकट के बाद भारत सरकार द्वारा अतिरिक्त वित्तीय सहायता के लिए अनुरोध करने पर दी थी, ताकि अर्थव्यवस्था में क्रेडिट में संवृद्धि सुनिश्चित हो सके और अवसंरचना के लिए वित्त तक लगातार पहुंच बनी रहे।

2009 और 2013 के बीच दी जाने वाली सहायता में शामिल धनराशियां इस प्रकार हैः इंटरनेशनल बैंक फ़ॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (आईबीआरडी) से 12 अरब डॉलर, इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) से 8.3 अरब डॉलर और इंटरनेशनल फ़ाइनैंस कार्पोरेशन (आईएफ़सी) से निवेश के तौर पर 5.2 अरब डॉलर।

जनवरी 2013 में 77 परियोजनाओं में आईबीआरडी और आईडीए की शुद्ध वचनबद्धता 23 अरब डॉलर (आईबीआरडी 13 अरब डॉलर और आईडीए 9.9 अरब डॉलर) थी। जनवरी 2013 के अंत में आईएफ़सी के पोर्टफ़ोलिओ में 219 परियोजनाएं शामिल थीं, जिनके लिए वचनबद्धता और वितरण की धनराशि कुल मिलाकर 4.1 अरब डॉलर थी।

 

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प्रेस विज्ञप्ति नं:
2013/276/SAR

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