प्रेस विज्ञप्ति

विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष जिम योंग किम भारत आएंगे

8 मार्च, 2013


किम सरकार के नेताओं से विकास-संबंधी चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे

वाशिंगटन डी.सी., 8 मार्च, 2013 - विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष जिम योंग किम 11 से 13 मार्च, 2013 तक भारत की यात्रा करेंगे और भारत के सामने मौजूद विकास-संबंधी कुछ चुनौतियों के साथ-साथ उन अवसरों के बारे में प्रत्यक्ष तौर पर जानकारी लेंगे, जिनकी मदद से भारत तेज़ी से आर्थिक संवृद्धि अर्जित कर ग़रीबी दूर कर सकता है। यह गत जुलाई में विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष का पद-भार संभालने के बाद किम की पहली भारत-यात्रा है।

भारत-प्रवास के दौरान किम सरकार के नेताओं, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के साथ अपनी बैठकों के दौरान न्याय-संगत संवृद्धि को सुदृढ़ करने के लिए भारत की प्रमुख पहलकदमियों पर विचार-विमर्श करेंगे। वे नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम् से भेंट करेंगे। वे मुख्य मंत्री अखिलेश यादव से मिलने के लिए उत्तर प्रदेश में लखनऊ तथा कानपुर भी जाएंगे और राज्य में, जहां भारत के सर्वाधिक ग़रीब रहते हैं, विकास-संबंधी चुनौतियों का पता लगाएंगे।

किम ने कहा है, “भारत का विकास-संबंधी अनुभव विस्तृत और बहुमूल्य है तथा मैं इसकी सफलताओं का वृत्तांत सुनने को उत्सुक हूं, ताकि मुझे पता चल सके कि यह किस प्रकार दूसरे देशों का मार्ग दर्शन कर सकता है। अपनी इस यात्रा से मुझे यह पता लगाने का मौका मिलेगा कि विश्व बैंक भारत में ग़रीबी दूर करने और जनता के सभी वर्गों के बीच समृद्धि का प्रसार करने के लिए और क्या कर सकता है।”

विश्व बैंक ग्रुप के अध्यक्ष ऐसे समय में भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, जब इसका तेज़ी से शहरीकरण हो रहा है - एक करोड़ भारतवासी प्रति वर्ष गांवों से कस्बों और शहरों में आ जाते हैं। किम ग्रामीण जीवन की उन वास्तविकताओं का पता लगाने के लिए उत्तर प्रदेश में एक गांव का दौरा करेंगे, जो लोगों को कस्बों और नगरों को जाने के लिए विवश कर रही हैं । इसके बाद किम शहरीकरण के प्रबंधन में निहित चुनौतियों का प्रत्यक्ष तौर पर अनुभव करने के लिए कानपुर जाएंगे, जो उत्तर प्रदेश के महानगरों में से है।   

किम ने कहा है, “भारत में हो रहा ऐतिहासिक रूपांतरण ऐसा अवसर प्रदान करता है, जिससे लाखों-करोड़ों लोगों को ग़रीबी से ऊपर उठाया जा सकता है, लेकिन साथ ही देश के सामने लोगों को रोज़गार, मकान और बुनियादी सेवाएं मुहैया कराने की भारी चुनौतियां भी मौजूद हैं। शहरों में रहने वाले भारतवासियों का एक-चौथाई हिस्सा पहले से ही मलिन बस्तियों में रह रहा है, जिसकी स्वच्छ पेय जल, समुचित सफ़ाई, बिजली या सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच सीमित है। मैं यह देखने आया हूं कि भारत अपनी जनता के लिए शहरी केन्द्रों को हरे-भरे, रहने लायक नगरों में बदलने की दिशा में जो प्रयास कर रहा है उसमें विश्व बैंक किस प्रकार मदद कर सकता है।”

भारत विश्व बैंक ग्रुप का सबसे बड़ा क्लाइंट है। 2009-2013 के बीच विश्व बैंक ग्रुप ने भारत को लगभग 25.5 अरब डॉलर का ऋण प्रदान किया। इसमें इंटरनेशनल बैंक फ़ॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (आईबीआरडी) से 12 अरब डॉलर, इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) से 8.3 अरब डॉलर और इंटरनेशनल फ़ाइनैंस कार्पोरेशन (आईएफ़सी) से निवेश के तौर पर 5.2 अरब डॉलर शामिल हैं। जनवरी 2013 में 77 परियोजनाओं में आईबीआरडी और आईडीए की सकल वचनबद्धता (कमिटमेंट) 23.1 अरब डॉलर (आईबीआरडी 13.2 अरब डॉलर और आईडीए 9.9 अरब डॉलर) थी। जनवरी 2013 के अंत में आईएफ़सी के पोर्टफ़ोलिओ में 219 परियोजनाएं शामिल थीं, जिनके लिए वचनबद्धता और वितरण की धनराशि कुल मिलाकर 4.1 अरब डॉलर थी।

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प्रेस विज्ञप्ति नं:
2013/268/SAR

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