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प्रेस विज्ञप्ति

परियोजना पर हस्ताक्षरः विश्व बैंक द्वारा महाराष्ट्र में कृषि प्रतिस्पर्द्धात्मकता में सुधार के लिए 10 करोड़ डॉलर के ऋण को स्वीकृति

2 नवम्बर, 2010




नई दिल्ली, 2 नवम्बर, 2010: आज यहां भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने महाराष्ट्र कृषि प्रतिस्पर्द्धात्मकता परियोजना के लिए 10 करोड़ डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले प्रतिनिधि इस प्रकार थेः भारत सरकार की ओर से संयुक्त सचिव श्री वेणु राजमणि, महाराष्ट्र सरकार की ओर से श्री सुधीर कुमार गोयल तथा विश्व बैंक के भारत में कंट्री डाइरेक्टर रॉबर्टो ज़ाघा।

इस परियोजना से महाराष्ट्र के किसान समुदाय की उत्पादकता, मुनाफ़े तथा बाज़ार तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादन के विविधीकरण और गहनीकरण का समर्थन करने के लिए तकनीकी जानकारी, बाज़ार-संबंधी जानकारी और बाज़ार-नेटवर्क सुलभ कराकर किसानों की क्षमता को मजबूत करना है।

महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता और विपणन विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. एस.के. गोयल ने कहाः “बजाय इसके कि किसान बाज़ारों की खोज करें, महाराष्ट्र कृषि प्रतिस्पर्द्धात्मकता परियोजना से किसानों को बाज़ारों में लाने में मदद मिलेगी।”

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित महाराष्ट्र देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है। तीन करोड़ हेक्टेयर से अधिक इलाके पर फैले इस राज्य की आबादी 10 करोड़ से अधिक है। राज्य की लगभग 58 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। अधिकतर लोग अपना गुज़ारा करने के लिए किसी न किसी रूप में खेती पर निर्भर करते हैं। हालांकि प्रति व्यक्ति आय के लिहाज़ से यह देश के सर्वाधिक संपन्न राज्यों में से है, इसमें विषमताएं भी काफी हैं। यह उन जगहों में से है, जहां निर्धन लोगों का भारी जमाव है – लगभग 3 करोड़ 20 लाख। इनमें से अधिकांश ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। इस समय राज्य की कृषि में खाद्यान्न की प्रमुखता है।

विश्व बैंक के भारत में कंट्री डाइरेक्टर रॉबर्टो ज़ाघा ने कहाः “इस कार्यक्रम से किसानों को उपभोक्ताओं की मांग में तेज़ी से होते हुए परिवर्तन का लाभ उठाने में सक्षम बनाना है। इससे फ़ार्म उत्पादन में विविधता को बढ़ावा मिलेगा, कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रसार होगा और किसानों में बाज़ार को अच्छी तरह समझने, इसे अपनाने और सक्रियतापूर्वक इससे बाहर निकलने तथा मौजूदा और वैकल्पिक बाज़ारों तक पहुंच बनाने की क्षमता पैदा होगी।”

किसान संगठन, नियंत्रित बाज़ारों के बाहर विकसित वैकल्पिक बाजार चैनलों के साथ-साथ आधुनिक होते परंपरागत थोक बाज़ारों द्वारा सुलभ कराई जाने वाली सुधरी हुई सेवाओं से मदद मिलेगी।

परियोजना के लिए इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) द्वारा ऋण के जरिए वित्त सुलभ कराया जाएगा, जो विश्व बैंक की एक ऋणदाता शाखा है और ब्याज-मुक्त ऋण सुलभ कराती है, जिसका भुगतान 35 वर्षों में करना होता है और यह भुगतान 10 वर्ष बाद शुरू होता है।

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