प्रेस विज्ञप्ति

मुंबई में उपनगरीय रेल प्रणाली में सुधार करने तथा भारत में बांधों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए विश्व बैंक 78 करोड़ डॉलर मुहैया कराएगा

29 जून, 2010




वाशिंगटन डी.सी., 29 जून, 2010: आज यहां विश्व बैंक ने मुंबई महानगरीय क्षेत्र में उपनगरीय रेल प्रणाली में और सुधार करने के लिए मुंबई शहरी परिवहन परियोजना 2ए (मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट 2A) के लिए 43 करोड़ डॉलर की धनराशि स्वीकृत की। उक्त क्षेत्र विश्व का एक विशालतम शहरी केन्द्र है, जिसकी आबादी वर्ष 2001 में 1.8 करोड़ थी। बैंक के बोर्ड ने बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (डैम रिहैबिलिटेशन एंड इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट) के वित्त पोषण के लिए भी 35 करोड़ डॉलर स्वीकृत किए हैं, जिसका उद्देश्य भारत में 220 से अधिक चुने हुए बांधों की सुरक्षा तथा इनके कामकाज की व्यावहारिकता में सुधार करना है।

मुंबई शहरी परिवहन परियोजना-2ए (MUTP-2A) - मुंबई महानगरीय क्षेत्र के सामने कई चुनौतियां हैं, जैसे ज़मीन, आवास, अवसंरचना और सामाजिक सेवाओं की कमी, जो बढ़ती हुई मांगों के अनुरूप नहीं रही हैं। वर्ष 2006-07 में एक अनुमान के मुताबिक 64 लाख यात्रियों ने प्रतिदिन मुंबई उपनगरीय रेल में यात्रा की (2.3 अरब यात्री प्रति वर्ष), जिसकी वजह से इस सेवा को नगर की जीवन-रेखा कहा जाता है, क्योंकि यह सभी मोटराइज़्ड ट्रिप्स के आधे से अधिक का प्रतिनिधित्व करती है। यात्रियों को भारी भीड़भाड़ वाली कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि नौ डिब्बों वाली ट्रेन में लगभग 4,500 लोग यात्रा करते हैं, जबकि इसकी क्षमता 1,700 यात्री है। इससे  डिब्बों में यात्रियों का घनत्व प्रति वर्ग मीटर 16 व्यक्ति बैठता है।

विश्व बैंक के वरिष्ठ शहरी परिवहन विशेषज्ञ और परियोजना के टीम लीडर ह्यूबर्ट नोवे-जोस्सेरैंड ने कहा है, ‘‘पहली मुंबई शहरी परिवहन परियोजना उपनगरीय रेलों में यातायात में बढ़ोतरी के बावजूद सर्वाधिक भीड़भाड़ वाले समय (पीक ऑवर्स) में नौ डिब्बों की ट्रेन में भीड़ के स्तर को 4,500 सवारियों से घटाकर 4,100 सवारी पर लाने में सफल रही है। इस नई परियोजना से क्षमता, परिचालन कुशलता तथा सुविधा के स्तर में और सुधार होगा तथा मुंबई महानगरीय क्षेत्र में उपनगरीय रेल प्रणाली के लिए उत्तरदायी एजेंसियों की संस्थागत क्षमता मजबूत होगी।’’

उक्त परियोजना का उद्देश्य ऊर्जा की खपत में कमी करते हुए और संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाकर सर्वाधिक भीड़ वाली अवधि में अधिक डिब्बों की व्यवस्था करना, इस दौरान भीड़ और यात्रा में लगने वाला समय कम करना, तथा परिचालन-कुशलता में सुधार करना है। इस प्रणाली में 720 डिब्बे और जोड़े जाएंगे। इस परियोजना से रखरखाव-संबंधी सुविधाओं का विस्तार होगा, अतिरिक्त स्टेबलिंग लाइनें सुलभ होंगी तथा मुंबई महानगरीय क्षेत्र में मध्य रेल के शेष भागों में संपूर्ण ट्रैक को 1500 वोल्ट डीसी से 25 केवी एसी ट्रैक्शन में बदल दिया जाएगा।

बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) - भारत में लगभग 4,700 बड़े बांध हैं - इनमें से आधे पच्चीस वर्ष से भी अधिक पुराने हैं, जबकि अन्य 400 निर्माणाधीन हैं। इन मौजूदा बांधों की कुल जल-संग्रहण क्षमता लगभग 283 अरब घन मीटर है। इन्होंने कृषि क्षेत्र और गांवों में संवृद्धि तथा विकास को गतिशील बनाने में मुख्य भूमिका निभाई है - ऐसा कार्य जो स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद से भारत सरकार की प्राथमिकता रहा है। सिंचित कृषि और पन-बिजली का विकास सरकार की खाद्य और ऊर्जा की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की रणनीति के मुख्य स्तंभ रहे हैं।
 
प्रमुख सिंचाई इंजीनियर और परियोजना के टीम लीडर जूप स्टोउटेसडिज्क ने कहा है, ‘‘मानसून के अल्पकालिक मौसम के दौरान होने वाली भारी और अप्रत्याशित वर्षा में अवधि और स्थानिकता की दृष्टि से भिन्नता होती है और इससे वर्ष के दौरान सिंचाई तथा अन्य दूसरे कार्यों के लिए जल की मांग पूरी नहीं हो पाती। इस बात को ध्यान में रखते हुए जल-संग्रहण भारत के लिए आवश्यक है। लेकिन, अनेक बड़े बांधों के लिए आधुनिक सुरक्षा उपायों और इनकी मॉनिटरिंग करने वाले उपकरणों की ज़रूरत है। इस परियोजना से केरल, मध्य प्रदेश, ओड़िसा और तमिल नाडु राज्यों में 220 से अधिक बांधों का पुनर्वास और आधुनिकीकरण करने में मदद मिलेगी।’’

इसके अलावा, परियोजना का उद्देश्य भारत सरकार के भीतर तथा सहभागी राज्यों में बांधों की सुरक्षा-संबंधी आश्वासन के लिए संस्थागत, कानूनी और तकनीकी फ़्रेमवर्क को सुदृढ़ करना भी है।

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