मुख्य कहानी

पाँचवीं विद्युत प्रणाली विकास परियोजनाः 1 अरब डॉलर

22 सितम्बर, 2009

कहानी की प्रमुख घटनाएं
  • बिजली का कार्यक्षम वितरण भारत की ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • पाँच वितरण प्रणालियों को मजबूत बनाने में और उनके विस्तार में पॉवरग्रिड को ऋण से मदद मिलेगी।
  • उत्तरी, पश्चिमी तथा दक्षिणी क्षेत्रों की प्रणालियों को मजबूत बना कर उनका विस्तार किया जाएगा।

सितंबर 22, 2009: भारत में बिजली की भारी कमी है। लगभग आधे भारतीय घरों में (44%) बिजली नहीं है। 2007-2008 में भारत में बिजली की प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत विश्व के औसत की केवल 30% थी। उत्पादन क्षमता बिजली की वर्तमान मांग को पूरा कर पाने में असमर्थ है, और उपभोक्ता तक बिजली ले जाने वाले प्रसारण तथा वितरण नेटवर्क अपर्याप्त।

देश के टिकाऊ तथा सर्व-समावेशी विकास के लिए भारत के विद्युत क्षेत्र का विकास अति महत्वपूर्ण होने की वजह से भारत सरकार ने 2012 तक सबके लिए बिजली उपलब्ध कराने की एक महत्वाकांक्षी योजना शुरु की है। इसमें उत्पादन क्षमता को वर्तमान 147 गिगावाट से बढाकर 200 गिगावाट करने की योजना है, जिसमें निजी क्षेत्र व्दारा अधिकतम संभव निवेश प्रोत्साहित करना भी शामिल है। अधिक स्वच्छ उर्जा के स्त्रोत - जैवद्रव्यमान, जल, सौर, पवन तथा आण्विक - भी विकसित किये जा रहे हैं।

भारत के राष्ट्रीय निर्देशक रॉबर्ट झाग़ा इस परियोजना का महत्व

समझाते हुए।

भारत के ऊर्जा संसाधन देश भर में असमान रूप से फैले हैं, जिससे अधिकता के क्षेत्रों से कमी वाले क्षेत्रों को बिजली का कार्यक्षम वितरण करना अति महत्वपूर्ण है। इसलिए अखिल-भारतीय राष्ट्रीय प्रसारण नेटवर्क - राष्ट्रीय ग्रिड को मजबूत कर उसका विस्तार करना आज की पहली प्राथमिकता है। इसलिए 11वीं योजना के अंत (2007-2012) तक पॉवरग्रिड - राष्ट्रीय प्रसारण प्रणाली संचालक - की देश भर में उत्पादित बिजली के प्रसारण की क्षमता को वर्तमान 45% से बढाकर 60% तक करने की भारत सरकार की योजना है।

विश्व बैंक द्वारा आधार

वैश्विक संकट के मद्देनज़र तथा भारत सरकार के निवेदन पर विश्व बैंक पॉवरग्रिड को 1 अरब डॉलर का ऋण दे रही है। इस ऋण से पॉवरग्रिड को देश के उत्तरी, पश्चिमी तथा दक्षिणी क्षेत्रों की पाँच प्रसारण प्रणालियों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। इससे ऊर्जा की अधिकता वाले क्षेत्रों से देश के निम्न सेवा-प्राप्त शहरों और गांवों को बिजली भेजने में सुविधा होगी। इससे राष्ट्रीय ग्रिड का एकीकरण बढेगा, जिससे प्रणाली की विश्वसनीयता बढेगी और प्रसारण हानि में कमी आएगी।

पॉवरग्रिड के वित्त निर्देशक, श्री जे. श्रीधरन पॉवरग्रिड के विस्तार में ऋण की

मदद का वर्णन करते हुए।

विश्व बैंक परियोजना की कुल औसत लागत का 64% धन देगी। सारी योजनाएं 2014-15 तक पूरी हो जाना अपेक्षित है। यह ऋण परिवर्तनक्षम वितरण, 5 वर्ष की कृपा अवधि सह 29.5 वर्षों में देय आईबीआरडी का लचीला ऋण होगा।

विश्व बैंक ने पॉवरग्रिड को उसकी स्थापना से ही आधार दिया है और इस अवधि में कंपनी ने अपने प्रसारण नेटवर्क में लगभग तिगुनी वृद्धि कर विश्व की सबसे बडी विद्युत प्रसारण कंपनियों में जगह बना ली है।

 

 

प्रश्नोत्तरी

1. प्रस्तावित ऋण की विकास अनिवार्यता क्या है?

44% से अधिक भारतीय घरों में दैनिक ज़रूरतों के लिए भी बिजली नहीं है। विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति की कमी आर्थिक विकास में भी बाधा डाल रही है, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों में 4% से लेकर 16% तक ऊर्जा की कमी है। देश के ऊर्जा संसाधन देश भर में असमान रूप से फैले होने की वजह से विभिन्न क्षेत्रों को जोडने के लिए और बिजली को उपभोक्ताओं तक कार्यक्षम रूप से पहुँचाने के लिए राष्ट्रीय प्रसारण उपयोगिता व्दारा राष्ट्रीय ग्रिड, पॉवरग्रिड, की स्थापना की गई है।

भारत सरकार द्वारा 2012 तक बिजली का उत्पादन बढाकर सबके लिए बिजली उपलब्ध कराने की एक महत्वाकांक्षी योजना शुरु की जाने के साथ ही वर्तमान प्रसारण नेटवर्क में वृद्धि तथा मजबूती लाना अत्यंत आवश्यक है जिससे यह अतिरिक्त बिजली सारे देश में कार्यक्षम रूप से पहुँच सके। योजनाओं के मुताबिक, 11वीं योजना में पॉवरग्रिड के एकीकृत प्रसारण नेटवर्क को खासी वृद्धि के लिए लक्ष्यित किया गया है और इसकी बिजली के प्रसारण की क्षमता को वर्तमान 45% से बढाकर 60% तक करने की योजना है।

2. इस कार्यक्रम के लिए किस स्तर की वित्तीय सहायता आवश्यक है?

राष्ट्रीय प्रसारण विस्तार की अनुमानित लागत रु. 75000 करोड (लगभग 16.5 अरब डॉलर) है, जिसमें से रु. 20000 करोड निजी क्षेत्र से आएंगे, जबकि प्रमुख हिस्सा --- रु. 55000 करोड (लगभग 12 अरब डॉलर) पॉवरग्रिड व्दारा आंतरिक संसाधनों से तथा बाह्य वित्तीय सहायता, जैसे विश्व बैंक का ऋण, से जुटाए जाएगा।

पॉवरग्रिड की मजबूत वित्तीय स्थिती उसे घरेलू वित्तीय सहायता जुटाने में कोई कठिनाई न होना सुनिश्चित करती है - दरअसल उसने 2008/9 में 7.5 अरब डॉलर के बाँड जारी किये थे और अगले तीन सालों में पूंजी बाज़ारों से लगभग 3 अरब डॉलर और जुटाने की योजना है। लेकिन, वैश्विक आर्थिक संकट के चलते पूंजी प्रवाह में कमी आ जाने से पॉवरग्रिड के विस्तार कार्यक्रम हेतु आवश्यक व्यावसायिक वित्तीय सहायता में सुविधा के लिए भारत सरकार ने विश्व बैंक से वित्तीय सहायता का निवेदन किया है। इस प्रकार अधोसंरचना में निवेश के जरिये यह कार्यक्रम भारत सरकार के अर्थव्यवस्था को प्रेरणा देने के प्रयासों में भी योगदान देगा।

3. विश्व बैंक ने पहले भी पॉवरग्रिड को आधार दिया है। वह अनुभव कैसा था?

प्रस्तावित परियोजना बैंक की पॉवरग्रिड के साथ उस 15-वर्षीय सफल भागीदारी को आगे बढाती है, जिसने कंपनी को एक विश्वस्तरीय पेशेवर हस्ती बनते देखा है। बैंक के पॉवरग्रिड के साथ जुडने से उसे न केवल अपने निवेश कार्यक्रम के लिए 3.1 अरब डॉलर की वित्तीय मदद मिली है, बल्कि बैंक ने उसे उसके संचालन और प्रबंधन को विश्व स्तरीय बनाने के प्रयासों में, उसके सामाजिक और वातावरणीय कार्यों के सुधार में तथा अधिक निजी भागीदारी को आकृष्ट करने में भी मदद दी है।

अपने 15 वर्षीय कार्यकाल में पॉवरग्रिड ने कई गुना वृद्धि की है और भारतीय विद्युत क्षेत्र के विकास में लक्षणीय योगदान दिया है। योजना, संचालन, प्रबंधन तथा समग्र प्रशासन में नियमित सुधार के जरिये पॉवरग्रिड अब न केवल भारत में, बल्कि अन्य विकासशील देशों में भी राज्य-स्वामित्व वाली प्रसारण कंपनियों के लिए आदर्श बन गई है। यह अद्यतन राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय भार वितरण केन्द्रों के साथ अति उच्च वोल्टेज (ईएचवी) प्रसारण प्रणाली का संचालन तथा रखरखाव करती है, जो विश्व की सबसे बडी प्रणालियों में से एक है। इसकी ठोस प्रशासन पद्धति के सम्मान स्वरूप भारत सरकार ने मई 2008 में इसे “नवरत्न” पुरस्कार से नवाज़ा है, जो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए सर्वोच्च सम्मान होता है। अपने केन्द्रीय प्रसारण कार्य के अलावा पॉवरग्रिड राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सलाहकार सेवा भी देती है, प्रमुखतया अफगानिस्तान में एक कार्यकुशल प्रसारण प्रणालियाँ स्थापित करने और उसका संचालन करने संबंधी कार्यों में।

स्थानीय वातावरण की सुरक्षा में और अपनी गतिविधियों से प्रभावित हुए लोगों के सामाजिक कल्याण हेतु अधिक उच्च कारपोरेट मानक अपनाने में भी बैंक के साथ भागीदारी ने पॉवरग्रिड की मदद की है। पॉवर की सबसे बडी सफलताओं में से एक उसकी अपनी गतिविधियों से वातावरण पर पडे प्रभाव का प्रबंधन करने में निहित है। उसने कई ऐसे आविष्कार किये हैं जो प्राकृतिक संसाधनों एवं मानव निवास स्थलों के नुकसान को कम करते हैं। जैसे, कम से कम विघ्न डालने वाले बिजली के तारों का मार्ग और उपकेन्द्रों की जगह निर्धारित करने के लिए भूगोलीय सूचना प्रणाली (जीआईएस) तथा उपग्रह छायांकन का प्रयोग किया जाता है। यह अभयारण्यों तथा संरक्षित वनों में विसतृत हरियाली के बचाव में काफी कारगर सिद्ध हुआ है।

1 1अमरीकी डॉलर की विनिमय दर = रु. 45


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