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वाशिंगटन, 28 जून, 2024 — विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने आज भारत को दूसरी बार कम कार्बन ऊर्जा के विकास में तेजी लाने के लिए 1.5 अरब डॉलर के ऑपरेशन के लिए वित्तपोषण को मंजूरी दी । यह ऑपरेशन हरित हाइड्रोजन के लिए एक जीवंत बाजार के विकास को बढ़ावा देने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने और कम कार्बन ऊर्जा निवेश के लिए वित्त को प्रोत्साहित करने का प्रयास करेगा।
भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है, और उम्मीद है कि यह तेज़ी से आगे बढ़ती रहेगी। आर्थिक वृद्धि को उत्सर्जन वृद्धि से अलग करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने की आवश्यकता होगी, विशेष रूप से उन औद्योगिक क्षेत्रों में जिन्हें कम करना मुश्किल है। इसके लिए, ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और खपत के विस्तार के साथ-साथ कम कार्बन निवेश के लिए वित्त जुटाने को बढ़ावा देने के लिए जलवायु वित्त के तेज़ विकास की आवश्यकता होगी।
दूसरा लो-कार्बन एनर्जी प्रोग्रामेटिक डेवलपमेंट पॉलिसी ऑपरेशन, हरित हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइज़र के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सुधारों में सहायता करेगी, जो हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए आवश्यक और महत्वपूर्ण तकनीक है। यह ऑपरेशन नवीकरणीय ऊर्जा को और बढ़ावा देने के लिए सुधारों का भी समर्थन करेगा। उदाहरण के लिए, बैटरी ऊर्जा भंडारण समाधानों को प्रोत्साहित करके और ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण में सुधार के लिए भारतीय विद्युत ग्रिड कोड में संशोधन करके।
जून 2023 में, विश्व बैंक ने 1.5 अरब डॉलर की पहली निम्न-कार्बन ऊर्जा प्रोग्रामेटिक विकास नीति योजना को मंजूरी दी थी । इसमें हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए ट्रांसमिशन शुल्क की छूट, सालाना 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा निविदाएं शुरू करने के लिए एक स्पष्ट मार्ग दिखाना और राष्ट्रीय कार्बन क्रेडिट बाजार के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना शामिल है ।
भारत के लिए विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्ट तानो कुआमे ने कहा, "विश्व बैंक भारत की निम्न-कार्बन विकास रणनीति का समर्थन जारी रखते हुए प्रसन्न है। यह देश के शुद्ध-शून्य लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा और जो निजी क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार पैदा करेगा। वास्तव में, पहली और दूसरी दोनों योजनाओं में ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया है।"
इस योजना द्वारा समर्थित सुधारों के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2025/26 से प्रति वर्ष कम से कम 450,000 मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन और 1,500 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइज़र का उत्पादन होने की उम्मीद है। इसके अलावा, इससे नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने और प्रति वर्ष 50 मिलियन टन उत्सर्जन में कटौती लाने में भी महत्वपूर्ण रूप से मदद मिलेगी। यह योजना राष्ट्रीय कार्बन क्रेडिट बाजार को और विकसित करने के लिए उठाए गए कदमों में भी सहायक होगी।
"भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार किया है जिसके आधार पर ग्रीन हाइड्रोजन के लिए घरेलू बाजार विकसित करने के लिए साहसिक कदम उठाए हैं। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की प्रोत्साहन योजना के तहत पहली निविदाओं में निजी क्षेत्र की महत्वपूर्ण रुचि प्रदर्शित की गई है," इस योजना के लिए टीम लीडर ऑरेलियन क्रूस, शियाओडोंग वांग और सुरभि गोयल ने कहा कि "यह योजना ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा के बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने में मदद कर रही है। यह राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्यों को प्राप्त करने की भारत की यात्रा में योगदान देगी।"
यह योजना भारत सरकार की ऊर्जा सुरक्षा और विश्व बैंक की हाइड्रोजन फॉर डेवलपमेंट (H4D) भागीदारी से जुड़ी हुई है।
इस योजना के लिए वित्तपोषण में अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) से 1.46 अरब डॉलर का ऋण और अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (आईडीए) से 31.5 मिलियन डॉलर का ऋण शामिल है।
डायना चुंग
शिल्पा बनर्जी
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