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प्रेस विज्ञप्ति

लखनऊ-मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के पुनर्गठन पर विश्व बैंक का बयान

5 मई, 2010




नई दिल्ली, 6 मई 2010 -  सरकार के राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के पूर्व-पश्चिम हिस्से की लखनऊ-मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना (एलएमएनएचपी) की शीघ्र संपूर्णता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार तथा विश्व बैंक इस महत्वपूर्ण परियोजना, जो बैंक द्वारा मदद प्राप्त है, का पुनर्गठन कर रहे हैं। पुनर्गठित परियोजना का प्रथम लक्ष्य होगा लखनऊ तथा उत्तर प्रदेश (यूपी)/बिहार सीमा के बीच (राष्ट्रीय राजमार्ग 28 पर करीब 328 किमी) सडक निर्माण की गुणवत्ता एवं गति को बढाना, तथा इस हिस्से की सुरक्षितता तथा उपयुक्तता बढाने में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की मदद करना। एनएच 28 के यूपी-बिहार सीमा से मुजफ्फरपुर तक के बिहार में आने वाले 155 किमी लंबे हिस्से के सुधार के लिए एनएचएआई अलग से निधी देगा।

एलएमएनएचपी में ठेकों की धीमी प्रगति और कमजोर कार्यस्थल सुरक्षा की साझा चिंताओं के चलते सडक परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच), एनएचएआई तथा विश्व बैंक ने परियोजना के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए नवंबर 2008 में संयुक्त रूप से एक समयबद्ध कार्ययोजना बनाई। पहले ही करीब दो साल देरी हो चुकी इस परियोजना की कार्यकुशल संपूर्णता के सिए कार्ययोजना में यह प्रावधान था कि ठेकेदारों को एक न्यूनतम मासिक प्रगति दर बनाए रखनी होगी। किंतु चार पूर्वी ठेकों (ठेका योजना 9, 10, 11 तथा 12) पर काम कर रहे ठेकेदार संतोषजनक प्रगति हासिल करने में सतत नाकामयाब रहे। एनएचएआई ने एक ठेका निरस्त कर दिया और बैंक से निवेदन किया कि चार ठेकों को बैंक निधी सहायता से बाहर कर दिया जाए जिससे ऋण की राशि बेहतर उपयोग में लाई जा सके।

एनएच 28 पर लखनऊ तथा यूपी-बिहार सीमा के बीच स्तर-सुधार कार्य के अलावा पुनर्गठित परियोजना कार्यस्थल तथा निर्माण सुरक्षा उपायों में सुधार हेतु एनएचएआई को उसके सडक सुरक्षा प्रकोष्ठ में मजबूती लाने में मदद देगी; सडक सुरक्षा उपायों में सुधार लाने के लिए तथा राजमार्ग निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए सुरक्षित-हरित-राजमार्ग पायलट शुरु करने में एनएचएआई को मदद देगी; एनएचएआई के आंतरिक प्रक्रिया नियंत्रण और वित्तीय प्रणालियों में सुधार के लिए उद्यम संसाधन योजना (ईआरपी) की स्थापना करने में उसकी मदद करेगी।

एनएचएआई, एमओआरटीएच तथा बैंक एक तकनीकी सहायता परियोजना पर भी साथ-साथ काम कर रहे हैं, जो एनएचएआई को अपनी संस्थागत क्षमता और संक्रियात्मक कार्यकुशलता बढा कर एनएचडीपी के कार्यान्वयन में तेजी लाने में मदद करेगी।

62 करोड अमरीकी डॉलक लागत की एलएमएनएचपी को बैंक के बोर्ड ने दिसंबर 2004 को मंजूरी दी थी और मूल ऋण की अवधि 30 जून 2010 को समाप्त होनी थी। 29 अप्रैल 2010 तक 78 प्रतिशत ऋण वितरित किया जा चुका था। बैंक के कार्यकारी निर्देशक मंडल की आज मंजूरी मिलने पर परियोजना के पुनर्गठन के तहत ऋण की अवधि 30 जून 2012 तक बढा दी गई है।

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