प्रेस विज्ञप्ति

समाचार रिलीज़: विश्व बैंक द्वारा भारत के बिहार राज्य में कोसी की बाढ़ से प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण के लिए 22 करोड़ डॉलर का ऋण

9 सितम्बर, 2010



वाशिंगटन, 9 सितम्बर, 2010: आज यहां  विश्व बैंक ने भारत के बिहार राज्य में वर्ष 2008 में कोसी में आई बाढ़ से प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण के लिए 22 करोड़ डॉलर के ऋण (क्रेडिट) को स्वीकृति प्रदान की। बिहार कोसी बाढ़ रिकवरी परियोजना लगभग एक लाख मकानों, 90 पुलों और 290 किमी. ग्रामीण सड़कों के पुनर्निर्माण के जरिए बाढ़ के दुष्परिणामों से उबरने के लिए वित्त मुहैया कराएगी। इस परियोजना का उद्देश्य आकस्मिकता निधि  (कंटिन्जेंसी फ़ंडिंग) की व्यवस्था के जरिए बाढ़-प्रबंधन क्षमता को मजबूत बनाकर, आजीविकाओं को बहाल तथा बिहार राज्य की आपात्कालिक प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार करते हुए भावी जोखिमों को कम करना है।

वर्ष 2008 में आई बाढ़ से बिहार के पांच ज़िलों में लगभग 33 लाख लोग प्रभावित हुए। लगभग दस लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया; 4,60,000 व्यक्तियों को 360 राहत शिविरों में अस्थाई तौर पर शरण दी गई; और 500 से अधिक लोगों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा। खेती पर निर्भर हज़ारों परिवारों को गाद बढ़ जाने की वजह से अपनी ज़मीनों से हाथ धोना पड़ा और मकानों तथा बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा। कुल मिलाकर आबादी, विशेष रूप से ग़रीबी की रेखा से नीचे रहने वालों और भूमिहीनों की हालत बेहद नाज़ुक हो गई। वास्तव में उक्त विनाश लीला के दो वर्ष बाद भी आपात्कालिक स्थिति बनी हुई है।

बिहार सरकार के मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी ने कहा, ‘‘वर्ष 2008 में कोसी में आई बाढ़ भारत में पिछले 50 वर्षों में आई बाढ़ों में सर्वाधिक भयंकर थी और भारत सरकार ने इसे एक राष्ट्रीय आपदा घोषित किया। बिहार सरकार बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्य चला रही है, जिससे हमें राज्य की विकास-संबंधी रणनीति में आपदा जोखिम प्रबंधन को प्रमुख स्थान देने में भी मदद मिलेगी। हम इस कार्य में विश्व बैंक की सहायता का स्वागत करते हैं।’’

भारत में विश्व बैंक के कंट्री डाइरेक्टर रॉबर्टो ज़ाघा ने कहा, ‘‘विश्व बैंक आपदाओं पर कारगर प्रतिक्रिया व्यक्त करने में भारत सरकार की पिछले एक दशक से भी अधिक समय से मदद कर रहा है। हम गत वर्षों के अपने अनुभव को बिहार में किए जा रहे प्रयासों में इस्तेमाल करेंगे।’’

बिहार सरकार बाढ़ के तुरंद बाद राहत कार्यों में अत्यंत व्यस्त रही है और इस कार्य में इसे भारत सरकार से मदद मिली है। विश्व बैंक को दिसम्बर 2009 में सहायता के लिए आधिकारिक अनुरोध मिला और इसने इस पर आपात्कालिक कार्यप्रणालियों के तहत विचार किया है। विश्व बैंक की परियोजना कार्य-प्रबंधक मंदाकिनी कौल ने कहा, ‘‘बिहार सरकार के लिए मकानों और बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण तथा लोगों की रोटी-रोज़ी (आजीविका) की व्यवस्था करना बेहद ज़रूरी है। हमारा उद्देश्य संभावित भावी आपदाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने की स्थानीय क्षमता का गठन करना भी है। प्रस्तावित परियोजना के पहले चरण में जोखिम और इसकी संभावनाओं में कमी करने के लिए बिहार राज्य के साथ मिलकर अनेक क्षेत्रों में बड़े पैमाने काम करना शामिल है। अगले चरणों में राज्य की आपदा-प्रबंधन से संबंधित दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सहायता के अधिक विस्तृत कार्यक्रम पर अमल किया जाएगा, जिसमें बाढ़-प्रबंधन, कनेक्टिविटी (सड़कों और पुलों का निर्माण) और कृषि-उत्पादकता भी शामिल होंगे।’’

परियोजना के पांच मुख्य घटक (कंपोनेंट) हैं -

•  मकान-मालिकों द्वारा मकान का पुनर्निर्माण - इस कार्य के तहत मकान-मालिकों द्वारा स्वयं पुनर्निर्माण के मॉडल पर लगभग एक लाख परिवारों के क्षतिग्रस्त मकानों का पुनर्निर्माण किया जाएगा।

•  सड़कों और पुलों का पुनर्निर्माण - इस कार्य से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के पुनर्निर्माण के जरिए संपर्क पुनः स्थापित करने में मदद मिलेगी। आशा है कि राजमार्गों और ज़िलों की प्रमुख सड़कों पर लगभग 90 पुलों तथा करीब 290 किमी. ग्रामीण सड़कों के दोबारा बन जाने से करीब 22 लाख व्यक्ति लाभान्वित होंगे।

•  बाढ़-प्रबंधन क्षमता का सुदृढ़ीकरण - इस कार्य के तहत बिहार में बाढ़ों के पूर्वानुमान से संबंधित सकल व्यवस्था और बाढ़ आने पर मिट्टी के कटाव को रोकने की क्षमता के गठन पर ध्यान दिया जाएगा।

•  आजीविका की बहाली और इसका विस्तार - इससे सामाजिक और वित्तीय पूंजी का गठन करने और बाढ़ से प्रभावित लोगों को आजीविका के अवसर पुनः मुहैया कराने और इनका विस्तार करने में मदद मिलेगी।

•  आपात्कालिक प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार - जिससे भावी आपदाओं की स्थिति में आवश्यक कार्यों, सामग्री और सेवाओं के लिए आवश्यक आाकस्मिकता निधि (कंटिन्जेंसी फंड) सुलभ होगी।

उक्त ऋण विश्व बैंक की ऋण मुहैया कराने वाली सहायक संस्था इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा, जो ब्याज-मुक्त ऋण मुहैया कराती है, जिनका भुगतान 10 वर्ष की ग्रेस अवधि के बाद 35 वर्षों में किया जाता है।

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