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प्रेस विज्ञप्ति

विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल द्वारा उत्तरखंड आपदा रिकवरी परियोजना के लिए $25 करोड़ की सहायता स्वीकृत

25 अक्टूबर, 2013

आपदा को झेलने में सक्षम लगभग 25,000 मकानों का निर्माण और लगभग 3,600 कि.मी. सड़क का पुनर्निर्माण किया जाएगा

वाशिंगटन, 25 अक्टूबर, 2013 - विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने आज यहां भारत में उत्तराखंड में आपदा के बाद की परिस्थितियों में राज्य की रिकवरी योजनाओं में मदद करने के साथ-साथ आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए इसकी क्षमता को मज़बूत बनाने के लिए $25 करोड़ की सहायता को स्वीकृत प्रदान की।

समय से प्रतिक्रिया व्यक्त करने के उद्देश्य से परियोजना पर विश्व बैंक की आपात्कालीन कार्यपद्धतियों के तहत ध्यान दिया गया और इसे तीन महीने के भीतर तैयार कर लिया गया।

जून में आई आपदा में क्षतिग्रस्त राज्य की अवसंरचना और संपदा का पुननिर्माण करने के लिए भारत सरकार के अनुरोध पर विश्व बैंक और एशिया डेवलपमेंट बैंक की एक साझा टीम ने क्षति और पुनर्निर्माण–संबंधी आवश्यकताओं का तेज़ी से मूल्यांकन (रैपिड डैमैज एंड नीड्स असेसमेंट - जेआरडीएनए) किया। उत्तराखंड सरकार के सहयोग से किए गए उक्त मूल्यांकन में विभिन्न क्षेत्रों में हुई क्षति का और साथ ही यह अनुमान भी लगाया गया कि पुनर्निर्माण पर लगभग $66.1 करोड़ की लागत बैठेगी। इसमें शामिल क्षेत्र इस प्रकार थे : आवास और सार्वजनिक अवसंरचना; सड़कें और पुल; जल आपूर्ति और स्वच्छता (शहरी औ्रर ग्रामीण दोनों); आजीविका (कृषि, मत्स्यपालन और मध्यम तथा लघु उद्यम); पर्यटन; ऊर्जा; और पर्यावरण।

विश्व बैंक के भारत-स्थित कंट्री डाइरेक्टर ओन्नो रुह्ल ने कहा,ऐसी आपदाएं, जैसी हमें उत्तराखंड में देखने को मिली, दसियों वर्षों के दौरान किए गए विकास को पलट सकती हैं और आर्थिक विकास तथा ग़रीबी दूर करने के संघर्ष के लिए बुनियादी ख़तरा हैं। इस परियोजना में पुनर्निर्माण और आपदाओं से निपटने की तैयारियों दोनों पर ध्यान दिया जाएगा। इससे मकानों के साथ-साथ छोटी सड़कों और पुलों समेत सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण से संबंधित प्रयासों से उत्तराखंड सरकार को तत्काल राहत पहुंचाने में मदद मिलेगी। भविष्य में आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारियां करने में राज्य की मदद करना उक्त परियोजना का अत्यंत महत्त्वपूर्ण अंग होगा। आपदा से निपटने के लिए की जाने वाली तैयारियों में सूचना और संचार प्रणालियों को सुचारू रखना भी शामिल है, जिनसे प्रभावित होने वाले संभावित लोगों को पहले से सावधान किया जा सकता है।उन्होंने आगे कहा, उत्तराखंड में समझदारी से निर्माण करना एक चुनौती है, ताकि पर्यावरण पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव पड़े। इस परियोजना में आपदाओं के बाद की पिछली राष्ट्रीय और वैश्विक रिकवरी परियोजनाओं से मिली शिक्षाओं को भी शामिल किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि रिकवरी लक्ष्यों के मुताबिक, कारगर और भावी आपदाओं का सामना करने के लिहाज़ से उपयुक्त है।

प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से संपन्न और भारत के एक अत्यंत लोकप्रिय पर्यटन तथा तीर्थ-स्थल उत्तराखंड को इस वर्ष 15 से 17 जून तक भारी वर्षा की वजह से केदारनाथ, रामबाड़ा, गौरीकुंड आदि जैसे कस्बों में विनाश का सामना करना पड़ा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल मिलाकर 580 लोग मौत का शिकार हो गए; 5,200 से अधिक लोग लापता हो गए; 4,200 गांव प्रभावित हुए; 9,200 पशु मर गए; लगभग 3,320 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए; लगभग 995 सार्वजनिक इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं; लगभग 9,000 किमी. सड़कें प्रभावित हुईं; और 85 मोटर पुल तथा 140 लगाम पुल (ब्रिडिल पुल) क्षतिग्रस्त हुए। आपदा के दौरान 70,000 से अधिक पर्यटक और 100,000 स्थानीय निवासी राज्य के ऊपरी पर्वतीय इलाकों में फंस गए।

उक्त परियोजना के मुख्य तत्व कुछ इस प्रकार हैं : क्षतिग्रस्त मकानों और सार्वजनिक इमारतों का पुनर्निर्माण करना; क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों का पुनर्निर्माण करना; तथा आपदा-संबंधी भावी जोखिमों के प्रबंधन के लिए राज्य की तकनीकी क्षमता बढ़ाना। इस परियोजना के अंतर्गत आपदा को झेलने में सक्षम लगभग 2,500 मकान बनाए जाएंगे। गांवों में लगभग 3,600 किमी. क्षतिग्रस्त सड़कों तथा ज़िलों में लगभग 675 किमी. अन्य सड़कों को नए सिरे से बनाया जाएगा। लगभग 440 किमी. लगाम (ब्रिडिल) सड़कों और लगभग 140 लगाम पुल (ब्रिडिल पुलों) का पुनर्निर्माण किया जाएगा, जिनसे पैदलयात्रियों को दूरदराज स्थानों में बसे गांवों तक पहुंचने में मदद मिलती है।

पुनर्निर्माण के अलावा परियोजना का एक अन्य प्रमुख अंग (कंपोनेंट) है – आपदा का जोखिम कम करने पर ध्यान देना। इससे राज्य आपदा-प्रबंधन प्राधिकरण की क्षमता सुदृढ़ होगी। उत्तराखंड के सभी तेरह ज़िलों में ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारियों के लिए विशेष कुशलता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ओडिशा राज्य आपदा-प्रबंधन प्राधिकरण और गुजरात राज्य आपदा-प्रबंधन प्राधिकरण आपदा-प्रबंधन संबंधी प्रयासों के अच्छे उदाहरण हैं और इनके विकास तथा विकास-प्रक्रिया से अच्छी शिक्षाएं मिलेंगी।

वरिष्ठ आपदा-प्रबंधन विशेषज्ञ तथा परियोजना के टॉस्क टीम लीडर सौरभ एस. दानी ने कहा, हालांकि पुनर्निर्माण परियोजना का एक प्रमुख अंग है, विश्व-स्तर पर इस बात का प्रमाण मौजूद है कि कुछ एक आपदा-प्रबंधन कार्यक्रमों में अवसंरचना के पुनर्निर्माण पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया है, लेकिन अन्य पूरक निवेशों के ज़रिये बेहतर अनुकूलन, तैयारियों तथा भविष्य के लिए सहनशीलता (रेसिलिएंस) का गठन करने पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया है, जैसे आपदा-जोखिम का मानचित्रण, मौसम-संबंधी संवर्धित भविष्यवाणियां और पूर्व-चेतावनी संचार प्रणालियां।

इसलिए, राज्य की पूर्व-चेतावनी संचार अवसंरचना (इंफ़्रास्ट्रक्चर) का पुनर्निर्माण करना परियोजना का एक महत्त्वपूर्ण अंग होगा और इससे सरकारी प्रतिष्ठानों तथा आपदा कम करने तथा इस पर प्रतिक्रिया के क्षेत्र में काम करने वाले अन्य दूसरी संस्थाओं की क्षमता में वृद्धि होगी। इसमें आपदाकालीन परिस्थितियों में बेहतर खोज तथा बचाव के साधनों और उन्नत प्रशिक्षण के ज़रिये राज्य के आपदा-प्रबंधन प्रतिक्रिया बल, अग्नि-शमन सेवाओं तथा अन्य प्रमुख एजेंसियों की समुचित प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए उपयुक्त क्षमता को सुदृढ़ करने पर भी ध्यान दिया जाएगा

परियोजना का वित्त-पोषण इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) द्वारा दिए जाने वाले ऋण से किया जाएगा। आईडीए विश्व बैंक का ही अंग है, जो विश्व के सर्वाधिक ग़रीब देशों की मदद करता है और ब्याज-मुक्त ऋण सुलभ कराता है, जो पच्चीस वर्षों में देय है और जिसका भुगतान पांच वर्ष बाद शुरू होता है।

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2014/152/SAR