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एडोब स्टॉक

नई दिल्ली, 18 जून, 2026— विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने भारत में निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति देने के लिए $1.5 बिलियन (लगभग 12,500 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। यह राशि 'निजी क्षेत्र विकास नीति वित्तपोषण (DPF) संचालन के तहत रोजगार सृजन को बढ़ावा देना' कार्यक्रम के अंतर्गत भारत के संरचनात्मक सुधारों को मजबूत करने के लिए दी गई है।

यह निजी क्षेत्र विकास नीति वित्तपोषण (DPF) संचालन उन 11 मिलियन (1.1 करोड़) युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित कर सकता है, जो अगले दो दशकों तक प्रत्येक वर्ष श्रम बाजार (वर्कफोर्स) में प्रवेश करेंगे।

यह निजी क्षेत्र विकास नीति वित्तपोषण (DPF) कार्यक्रम भारत में हाल के वर्षों में लागू किए गए बड़े संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाता है। इसके तहत टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को जोड़ने और आम जनता व व्यापारियों के लिए 'ईज़ ऑफ लिविंग' (सुलभ जीवन) और 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार सुगमता) को बेहतर बनाने वाले कानूनी सुधार शामिल हैं। यह कार्यक्रम नए उद्यमियों की राह आसान करने वाले नियमों, औपचारिक नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने वाले श्रम कानूनों, व्यापार-निवेश को सुव्यवस्थित करने के उपायों और बाजार से पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को सरल बनाने वाले सुधारों को सीधा सहयोग देता है।

हाल के दिनों में भारत के आर्थिक सुधार गवर्नेंस (शासन) के एक परिपक्व दौर को दर्शाते हैं। अब ध्यान केवल नए नियम बनाने पर नहीं, बल्कि व्यवस्था को सरल करने, कागजी कार्रवाई व अनुपालन का बोझ घटाने और नागरिकों व कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर है ताकि इसके सटीक परिणाम दिखें। सरल टैक्स व्यवस्था, नेक्स्ट-जेन जीएसटी, एमएसएमई (MSME) की अधिक समावेशी परिभाषा और आसान बिजनेस नियमों को इस तरह तैयार किया गया है जिससे रोजमर्रा का आर्थिक लेन-देन अधिक सुगम, तेज और पारदर्शी बने। इससे सरकारी नीतियों के प्रति भरोसा और स्थिरता मजबूत हुई है। कुल मिलाकर, ये सभी कदम 'नतीजों पर आधारित नीति-निर्माण' को दिखाते हैं, जो देश में दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती, पारदर्शिता और आपसी विश्वास को बढ़ावा देता है।

नवंबर 2025 में, भारत सरकार ने 29 जटिल श्रम कानूनों को चार व्यापक श्रम संहिताओं (Labor Codes) में समाहित करके एक अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और विकास-उन्मुख अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव रखी। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी कार्रवाई और नियमों के पालन को सरल बनाना, पुराने पड़ चुके प्रावधानों को आधुनिक रूप देना और एक ऐसा सुव्यवस्थित व कुशल ढांचा तैयार करना है जो श्रमिकों के अधिकारों और उनके कल्याण की पूरी सुरक्षा करने के साथ-साथ 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस' (व्यापार सुगमता) को भी बढ़ावा दे।

सरकारी अनुमानों के अनुसार—और एक सशक्त, समृद्ध व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करते हुए—भारत में रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। देश में कामकाजी लोगों की संख्या साल 2017-18 के 45.2 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 60.4 करोड़ हो गई है, यानी महज छह वर्षों में 15 करोड़ से अधिक नए रोजगार जुड़े हैं। इसी अवधि के दौरान, बेरोजगारी दर 6.0% से भारी गिरावट के साथ 3.2% पर आ गई और लगभग 90 लाख महिलाओं ने नियमित वेतन वाली नौकरियों (regular wage employment) में कदम रखा। ये आंकड़े समावेशी विकास और निरंतर श्रमिक सशक्तिकरण पर सरकार के विशेष जोर को रेखांकित करते हैं।

ये कदम श्रमिकों और उद्योगों दोनों को सशक्त बनाने वाले एक आधुनिक श्रम पारिस्थितिकी तंत्र (labor ecosystem) को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं, जो समावेशी और सतत विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

यह निजी क्षेत्र विकास नीति वित्तपोषण (DPF) कार्यक्रम वित्तीय वर्ष 2026-31 के लिए विश्व बैंक समूह की 'इंडिया कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क' (CPF) के बिल्कुल अनुरूप है, जो भारत सरकार के 'विकसित भारत @2047' के विजन से प्रेरित है। इसके तहत कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल को बेहतर बनाने, निजी निवेश को आकर्षित करने और विशेष रूप से महिलाओं व युवाओं के लिए उत्पादक रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

यह नई पहल तीन बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत के सुधारों को सीधा सहयोग देती है: बिजनेस के माहौल को अधिक सुगम बनाना, व्यापार और निवेश में खुलेपन को बढ़ावा देना, तथा उद्योगों के विस्तार और नए रोजगार के सृजन के लिए निजी पूंजी जुटाना।

विश्व बैंक के दक्षिण एशिया उपाध्यक्ष जोहान्स जुट्ट ने कहा, "चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बीच निजी पूंजी को आकर्षित करने और रोजगार सृजन के अपने सुधार एजेंडे पर भारत काफी अच्छी गति से आगे बढ़ रहा है। यह पहल कंपनियों पर कानूनी और कागजी कार्रवाई के बोझ को कम करके, बाजार तक उनकी पहुंच बढ़ाकर और वित्तीय मदद को सुलभ बनाकर भारतीय उद्योगों के विस्तार, निवेश और नई भर्तियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करती है — जिससे सीधे तौर पर विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।"

इस परियोजना के टास्क टीम लीडर्स ऑरेलियन क्रूस और लॉरेंट गोनेट ने कहा, "रोजगार और उद्यमिता (entrepreneurship) को बढ़ावा देने के लिए, यह निजी क्षेत्र विकास नीति वित्तपोषण (DPF) पहल मुख्य रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), महिला उद्यमियों और ऋण की पहुंच से दूर रहे कर्जदारों के लिए वित्तीय मदद के रास्ते खोलने वाले कदमों को सहयोग देती है। वित्तीय संसाधनों तक एमएसएमई की पहुंच आसान होने से कंपनियां और उनके कर्मचारी किसी भी बड़े आर्थिक संकट का सामना करने के लिए अधिक मजबूत बनेंगे और नए आर्थिक अवसरों का लाभ उठाने के लिए बेहतर स्थिति में होंगे।"

यह निजी क्षेत्र विकास नीति वित्तपोषण (DPF) पहल इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC) के जरिए विश्व बैंक समूह द्वारा हाल ही में किए गए निवेशों को गति देती है। इन निवेशों का मुख्य उद्देश्य एमएसएमई (MSME) सेक्टर के लिए निजी पूंजी को आकर्षित करना और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं से दूर रहे कर्जदारों, खासकर महिला उद्यमियों के लिए कर्ज की उपलब्धता को आसान बनाना है।

इनमें शामिल हैं: आदित्य बिड़ला कैपिटल लिमिटेड में लगभग $97 मिलियन का इक्विटी निवेश, एलएंडटी फाइनेंस लिमिटेड में $100 मिलियन का ऋण (debt) निवेश, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज में लगभग $150 मिलियन का ऋण निवेश, और मध्यम स्तर की कंपनियों (mid-market companies) की सहायता के लिए निजी इक्विटी फर्म एवरस्टोन कैपिटल पार्टनर्स फंड V को $242 मिलियन का निवेश (जिसमें से $191 मिलियन निजी क्षेत्र से एकत्रित गई पूंजी है)।

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