नई दिल्ली 10 अप्रैल, 2026 — विश्व बैंक के कार्यपालक निदेशक मंडल ने राजस्थान राज्य में राजमार्गों की दक्षता, मजबूती और सुरक्षा में सुधार लाने के लिए एक नई परियोजना के वित्तपोषण को मंजूरी दी है। इस परियोजना से कनेक्टिविटी में सुधार होगा जिससे 30 लाख से अधिक लोगों को लाभ होगा और कृषि, औद्योगिक, खनन और पर्यटन क्षेत्रों के आर्थिक कॉरिडोर में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा ।
भारत के सबसे बड़े राज्यों में से राजस्थान एक है और भारत के 40% बाजारों को जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है। यद्यपि राज्य ने वर्ष 2015-16 और वर्ष 2023-24 के बीच 11% की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है, लेकिन राज्य का सड़क अवसंरचना उस गति से विकसित नहीं हुआ है।
राजस्थान राजमार्ग आधुनिकीकरण परियोजना (225 मिलियन डॉलर) राजस्थान राज्य राजमार्ग प्राधिकरण को एक आधुनिक, सेवा-उन्मुख राजमार्ग एजेंसी में बदलने में सहयोग करेगी। साथ ही लगभग 800 किलोमीटर चयनित राजमार्ग कॉरिडोर का उन्नयन और रखरखाव करेगी, जिससे वे यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित, जलवायु-अनुकूल और विश्वसनीय बन सकें। यह परियोजना सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और पूरे राजस्थान में सुरक्षा बढ़ाने के लिए सड़क सुरक्षा प्रबंधन में सुधार पर विशेष बल देगी।
यह परियोजना भारत में पहली बार स्टेप अप लोन (एसयूएल) का आरम्भ करेगी। यह एक अभिनव वित्तपोषण साधन है जो परियोजना के शुरुआती, उच्च जोखिम वाले चरण के दौरान प्रारंभिक वित्तीय दबाव को कम करता है और परियोजना के चालू होने और बाजार से पुनर्वित्त प्राप्त करने की बेहतर स्थिति में आने के बाद उच्च दर पर ऋण प्रदान करता है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी और बाजार से उधार लेकर लगभग 295 मिलियन डॉलर की निजी पूंजी एकत्रित कर, यह परियोजना कुशल आवागमन, यातायात प्रबंधन और परिवहन लागत में कमी लाते हुए राज्य के बजट पर निर्भरता को कम करेगी।
विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक निदेशक पॉल प्रोसी ने कहा कि “क्षेत्रक केंद्रित मजबूत सुधारों के साथ-साथ निजी निवेश से लोगों के लिए अधिक और बेहतर वेतन वाली नौकरियां सृजित हो सकती हैं। यह परियोजना सुनिश्चित करेगी कि अधिक महिलाएं और युवा आर्थिक कॉरिडोर में रोजगार के अवसरों से आसानी से जुड़ सकें, जिससे औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।”
इस परियोजना से अच्छी या औसत दर्जे की सड़कों का हिस्सा 40 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो जाएगा और प्रमुख आर्थिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच यात्रा का समय कम हो जाएगा। डिजिटल प्रणालियाँ जयपुर और जोधपुर जैसे पर्यटन केंद्रों सहित 250 किलोमीटर के उच्च जोखिम वाले और घनी आबादी वाले कॉरिडोर में सड़क सुरक्षा को प्रभावशाली और यातायात प्रबंधन को मजबूत करेंगी, जिससे दुर्घटनाओं को कम करने और आवागमन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
परियोजना की टास्क टीम लीडर रीनू अनेजा ने कहा कि "सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और राजमार्गों के दीर्घकालिक प्रदर्शन को सुनिश्चित करना राजस्थान के बुनियादी ढांचे के कायाकल्प का मुख्य केंद्र है “। उन्होंने आगे कहा कि “एक नए 'सड़क एक सेवा के रूप में' दृष्टिकोण के माध्यम से, यह परियोजना निर्माण से आगे बढ़कर एक 'सर्विस-डिलीवरी' मॉडल पर ध्यान केंद्रित करती है, जो प्रदर्शन-आधारित प्रबंधन, सड़क सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ावा देती है।“
अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) से प्राप्त 225 मिलियन डॉलर के ऋण की अंतिम परिपक्वता अवधि 35 वर्ष है, जिसमें स्टेप-अप लोन की सुविधा तथा 5 वर्ष की अनुग्रह अवधि भी शामिल है।