प्रेस विज्ञप्ति9 अप्रैल, 2026

विकास की गति मध्य पूर्व संघर्ष के कारण धीमी होने के बावजूद, भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है; भविष्य में जोखिम और अनिश्चितता की संभावनाएं

The World Bank

विश्व बैंक समूह

नई दिल्ली, 9 अप्रैल, 2026 — वित्त वर्ष 27 में भारत की विकास दर 6.6% रहने का अनुमान है, क्योंकि मध्य पूर्व संघर्ष और आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के कारण बढ़ती ऊर्जा की कीमतें आर्थिक गतिविधि पर प्रभाव डाल रही हैं। विश्व बैंक के ताजा आर्थिक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मंदी के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।

आज जारी इंडिया डेवलपमेंट अपडेट में कहा गया है कि संघर्ष से उत्पन्न जोखिमों के बावजूद, अर्थव्यवस्था के मजबूत आर्थिक बुनियादी सिद्धांत और नीतियां कुछ सुरक्षा प्रदान करते हैं। पर्याप्त विदेशी भंडार, कम मुद्रास्फीति, मुख्यतः रुपये में मूल्यांकित सार्वजनिक ऋण, एक स्वस्थ वित्तीय क्षेत्र, और व्यापार विविधीकरण के प्रयास, बाहरी बाधाओं का दृढ़ता से सामना करने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

भारत के लिए विश्व बैंक के कार्यवाहक निदेशक पॉल प्रोसी ने कहा, "आर्थिक दृढ़ता और कार्यबल में अधिक से अधिक युवाओं को प्रवेश करने में सहायता करने के लिए निजी क्षेत्र के नेतृत्व में विकास को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा। विकसित भारत को प्राप्त करने के लिए, एक पूर्वानुमानित, व्यापार-सक्षम वातावरण ऊर्जा और बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा, और कृषि व्यवसाय जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने में मदद करेगा।"

इंडिया डेवलपमेंट अपडेट विश्व बैंक समूह के दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट का एक सहयोगी दस्तावेज़ है, जो दक्षिण एशिया क्षेत्र में आर्थिक विकास और संभावनाओं का विश्लेषण करता है। नवीनतम क्षिण एशिया आर्थिक अपडेट - औद्योगिक नीति के साथ काम करते हुए नामक रिपोर्ट वैश्विक ऊर्जा बाजारों में विघटन के कारण दक्षिण एशिया की 2026 में विकास दर 6.3% होने का अनुमान लगाती है। यह दर 2025 में 7% थी। मंदी के बावजूद, दक्षिण एशिया अन्य उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। 2027 में विकास दर 6.9% तक होने की उम्मीद है।

क्षेत्रीय रिपोर्ट में औद्योगिक नीति के उपयोग का गहराई से विश्लेषण भी शामिल है जिसमें सरकारें नीतिगत उपकरणों को अर्थव्यवस्था में आकार देने के लिए उपयोग कर रही हैं, बजाय इसे अकेले बाजारों पर छोड़ने के। दुनिया भर की सरकारें तेजी से औद्योगिक नीति का उपयोग कर रही हैं, और दक्षिण एशिया में औद्योगिक नीतियों को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में लगभग दोगुनी दर से लागू किया जा रहा है। लेकिन इन उपायों ने दक्षिण एशिया में मिश्रित परिणाम दिए हैं।

दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक समूह की मुख्य अर्थशास्त्री फ्रांजिस्का ओहनसॉर्ज ने कहा, "औद्योगिक नीति पर दक्षिण एशिया की मिश्रित सफलता कुछ देशों में सीमित कार्यान्वयन क्षमता, वित्तीय और बाजार क्षमता को दर्शाती है। जबकि व्यापक-आधारित सुधार प्राथमिकता बनी हुई है, सुविचारित औद्योगिक नीतियां विशिष्ट बाजार विफलताओं को संबोधित कर सकती हैं, जिसमें औद्योगिक पार्क, कौशल विकास कार्यक्रम, बाजार पहुंच सहायता और निर्यात गुणवत्ता मानकों में सुधार जैसे उपाय शामिल हैं।"

दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट शहरी विकास, पर्यटन और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सावधानीपूर्वक डिजाइन किए गए नीतिगत उपायों को लागू करने की सिफारिश करता है। साथ ही अंतर्निहित कारोबारी माहौल, नियामक स्थिरता और राज्य क्षमता में व्यापक सुधार की भी बात करता है - जो सभी रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

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