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नई दिल्ली, 2 फरवरी, 2026—विश्व बैंक के कार्यपालक निदेशक मंडल ने भारत के कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क को पुनर्गठित करने के लिए वित्तपोषण को मंजूरी दे दी है जिससे कि यह श्रम बाजार की जरूरतों के साथ बेहतर ढंग से तालमेल बिठा सके और कार्यबल में प्रवेश करने वाले लाखों स्नातकों के लिए अधिक रोजगार के अवसर खोल सके।
भारत की विकास यात्रा, प्रतिस्पर्धात्मकता और विकसित भारत बनने की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए रोजगार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत में युवाओं की बेरोजगारी में हिस्सेदारी लगभग 72 प्रतिशत है, और कौशल में लगातार असमानता बनी हुई है (युवाओं को जिस चीज़ के लिए प्रशिक्षित किया जाता है और कंपनियों की ज़रूरतों के बीच का अंतर) जिससे उत्पादकता, कंपनियों की वृद्धि और आय पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यद्यपि देश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) प्रणाली युवाओं को कौशल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, फिर भी इन संस्थानों को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें से कई में उचित सुविधाओं, योग्य प्रशिक्षकों और उद्योग मानकों को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधनों का अभाव है। इसके परिणामस्वरूप स्नातक रोजगार दर 50 प्रतिशत से भी कम है।
उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार क्षमता परिवर्तन का समर्थन करने वाला कार्यक्रम (पीएम-एसईटीयू) (830 मिलियन डॉलर का ऋण) आईटीआई नेटवर्क को पुनर्जीवित करने, कौशल प्रशिक्षण को श्रम बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने, प्रति वर्ष दस लाख से अधिक कुशल श्रमिक तैयार करने और अधिक युवा स्नातकों को कार्यबल में शामिल करने का लक्ष्य रखता है। एशियाई विकास बैंक के साथ संयुक्त रूप से तैयार किया गया यह कार्यक्रम कम से कम 680 मिलियन डॉलर की निजी पूंजी आईटीआई प्रणाली में निवेश करने के लिए आकर्षित करेगा।
विश्व बैंक इंडिया के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने कहा कि “हर साल 1.2 crore से अधिक लोग श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं, इसलिए रोजगार सृजन भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकता है। निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोजगार सृजन विश्व बैंक समूह के भारत के लिए नए कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क का मुख्य आधार है। आईटीआई को उन्नत बनाने के लिए भारत के 4 अरब डॉलर के निवेश का समर्थन करके, यह कार्यक्रम उद्योग-संचालित प्रशिक्षण को पूरे सिस्टम में समाहित करेगा ताकि उच्च प्लेसमेंट दर अपवाद नहीं बल्कि सामान्य बात बन जाए।”
आईटीआई में पेश किए जाने वाले अधिकांश ट्रेड, जैसे कि इलेक्ट्रीशियन, मैकेनिक या वेल्डर, परंपरागत रूप से पुरुष प्रधान हैं। अगले पांच वर्षों में, कार्यक्रम पाठ्यक्रम को अद्यतन करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि आईटीआई छात्रों में कम से कम 25 प्रतिशत महिलाएं हों, जिससे उन्हें बेहतर वेतन वाली नौकरियों तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के कार्य दल के प्रमुख मार्गुराइट क्लार्क और टोबी लिंडेन ने कहा कि “यह कार्यक्रम अब आईटीआई को प्रशिक्षण, परामर्श और उत्पादन कार्यों का अधिक संतुलित मिश्रण प्रदान करने में मदद करेगा, ताकि वे प्रशिक्षण का विस्तार और सुधार करने के लिए अपना राजस्व उत्पन्न कर सके।” उनहोंने आगे कहा कि “विस्तार केंद्रों के साथ हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से, संस्थान विशेषज्ञतापूर्ण और संसाधन-कुशल उत्कृष्टता केंद्र बन जाएंगे।”
830 मिलियन डॉलर के इस ऋण की अंतिम परिपक्वता अवधि 19.5 वर्ष है, जिसमें चार वर्ष की अनुग्रह अवधि भी शामिल है।
डायना चुंग
शिल्पा बनर्जी
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