पंच वर्षीय रूपरेखा (फाइव ईयर फ्रेमवर्क) उद्देश्य विकसित भारत को समर्थन देना है ।
नई दिल्ली, 31 जनवरी, 2026— विश्व बैंक समूह (डब्ल्यूबीजी) और भारत सरकार ने एक नए भागीदारी फ्रेमवर्क अर्थात कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क (सीपीएफ) की घोषणा की है जो भारत के विकास के अगले चरण को गति देने और विकसित भारत - जिसका लक्ष्य वर्ष 2047 तक एक विकसित देश बनना है - के उसके दृष्टिकोण को समर्थन देगा।
निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री , भारत सरकार ने कहा कि “हम विश्व बैंक समूह के साथ नए कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क का स्वागत करते हैं, जो हमारे विकसित भारत विजन के साथ पूरी तरह से मेल खाता है। सार्वजनिक निधियों को निजी पूंजी के साथ मिलाकर, ग्रामीण और शहरी भारत में अधिक रोजगार सृजित करना और बैंक समूह के वैश्विक ज्ञान से परियोजनाओं को समृद्ध बनाना, गति और स्तर दोनों पर स्थायी प्रभाव प्राप्त करने में महत्वपूर्ण होगा।"
इस नई साझेदारी का मुख्य आधार निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोजगार सृजन है। भारत के श्रम बाजार में प्रति वर्ष लगभग 1.2 करोड़ युवा प्रवेश कर रहे है। ऐसे में रोजगार से भरे क्षेत्रों में निजी निवेश को बढ़ावा देना देश के विकास के अगले चरण के लिए एक केंद्रीय प्राथमिकता है।
विश्व बैंक समूह की वैश्विक रोजगार रणनीति तीन स्तंभों पर आधारित है: भौतिक और मानवीय दोनों प्रकार के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में निवेश करना; पूर्वानुमानित कानून, नियम और विनियमों के माध्यम से व्यापार-अनुकूल वातावरण को मजबूत करना; और निजी निवेश को बढ़ाने में मदद करने के लिए जोखिम-प्रबंधन प्रक्रियाओं का उपयोग करना। यह दृष्टिकोण पांच ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित है जो बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर उपयुक्त रोजगार सृजित करते हैं: अवसंरचना और ऊर्जा, कृषि व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और मूल्यवर्धित विनिर्माण।
भारत और विश्व बैंक समूह के बीच नई रणनीतिक साझेदारी भारत में इस वैश्विक रोजगार रणनीति को लागू करती है और अगले पांच वर्षों में 8-10 अरब डॉलर के वार्षिक वित्तपोषण के साथ इसका समर्थन करती है, जिसमें रोजगार सृजन और बड़े स्तर पर निजी क्षेत्र की पूंजी एकत्रित करने के लिए बैंक समूह के सभी साधनों और विशेषज्ञता का उपयोग शामिल है।
विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा ने भारत में रहते हुए कहा, “भारत आज वैश्विक विकास के प्रमुख घटकों में से एक है। हमारी रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर भारत को और भी तेजी से आगे बढ़ने में मदद करना है।” उन्होंने आगे कहा “अधिक रोजगार सृजित करना हमारे काम का मूल है। यह साझेदारी वित्तपोषण, सुधारों और निजी क्षेत्र के निवेश को एक साथ लाती है जिससे कि विकास को लाखों भारतीयों के लिए अवसरों में बदला जा सके।”
यह नई रणनीतिक साझेदारी भारत सरकार और विश्व बैंक समूह के बीच एक वर्ष के सहयोग का परिणाम है, जिसका उद्देश्य भारत की विकास प्राथमिकताओं के समर्थन में अधिक चयनात्मकता, व्यापकता और प्रभाव की ओर अग्रसर होकर अपने सहयोग के तरीकों पर पुनर्विचार करना है।
यह साझेदारी कौशल उन्नयन, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बाधाओं को कम करने और अवसरों का विस्तार करने (विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए) के माध्यम से निजी क्षेत्र के नेतृत्व में रोजगार सृजन को प्राथमिकता देती है। यह चार रणनीतिक परिणामों पर केंद्रित है:
- ग्रामीण समृद्धि और अनुकूलता को बढ़ावा देना। भारत की 60 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए कृषि के अलावा आय के विविधीकरण, मूल्य श्रृंखलाओं और बाजार तक पहुंच को मजबूत करने और दुर्लभ जल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
- शहरी परिवर्तन और रहने योग्य शहरों का समर्थन करना। भारत की शहरी आबादी वर्ष 2050 तक दोगुनी होकर 80 करोड़ होने का अनुमान है। बुनियादी ढांचे, आवास, सेवाओं, नवीन वित्तपोषण तंत्र और एकीकृत योजना में निवेश, विकास के शक्तिशाली घटक के रूप में कार्य कर सकते हैं।
- लोगों में निवेश करना। प्राथमिकताएं जीवन चक्र के सभी पहलुओं को शामिल करती हैं—प्रारंभिक बचपन के स्वास्थ्य और पोषण से लेकर, माध्यमिक शिक्षा और बाजार के अनुरूप कौशल, स्कूल से कार्यस्थल तक सुगम संक्रमण और अधिक उत्तरदायी, रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणालियों तक।
- ऊर्जा सुरक्षा, मूलभूत बुनियादी ढांचे और अनुकूलता को मजबूत करना। विश्व बैंक समूह नवीकरणीय ऊर्जा, ई-मोबिलिटी और हरित हाइड्रोजन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों सहित निजी पूंजी और क्षमताओं को आकर्षित करके बुनियादी ढांचे के विस्तार में मदद कर रहा है।
नई साझेदारी रूपरेखा का कार्यान्वयन तत्काल शुरू होगा, जिसमें वर्तमान में चल रही परियोजनाएं भी शामिल हैं, जैसे कि:
- उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार क्षमता परिवर्तन का समर्थन: 830 मिलियन डॉलर का ऋण निजी क्षेत्र के साथ काम करने के लिए जो भारत के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क को उन्नत करने और दस लाख से अधिक युवाओं (विशेष रूप से युवा महिलाओं) को नौकरी के लिए तैयार कौशल हासिल करने में मदद करेगा।
- महाराष्ट्र जलवायु प्रतिरोधी कृषि परियोजना (चरण II): सटीक कृषि पद्धतियों में डिजिटल प्रौद्योगिकी को अपनाकर फसल उत्पादकता बढ़ाने और जलवायु अनुकूलता को मजबूत करने के लिए 490 मिलियन डॉलर की परियोजना।
- केरल स्वास्थ्य प्रणाली सुधार कार्यक्रम: 280 मिलियन डॉलर का यह कार्यक्रम विस्तारित ई-स्वास्थ्य सेवाओं, एकीकृत डेटा प्लेटफॉर्म और उन्नत साइबर सुरक्षा के माध्यम से केरल की डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करेगा।
- क्रेडिला वित्तीय सेवाएँ: 750 मिलियन डॉलर की एक पहल जिसका उद्देश्य करीब 190,000 छात्रों को नौकरी के लिए प्रासंगिक योग्यताएं हासिल करने और कक्षा से कार्यस्थल में संक्रमण करने के लिए उच्च शिक्षा वित्तपोषण का समर्थन करना है।
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना: विश्व बैंक समूह एक प्रोग्रामेटिक इकोसिस्टम दृष्टिकोण के माध्यम से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के परिवर्तन को गति दे रहा है, जो स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देता है, घरेलू विनिर्माण को मजबूत करता है, रोजगार सृजित करता है, शहरी परिवर्तन को गति देता है और भुगतान सुरक्षा तंत्र के माध्यम से नगर निगम और राज्य परिवहन उपक्रमों द्वारा सामना किए जाने वाले भुगतान जोखिमों का समाधान करता है।
यह साझेदारी विश्व बैंक समूह द्वारा 2023 से किए गए सुधारों से लाभान्वित होती है, जिससे यह ज़्यादा तीव्र, सरल और अधिक प्रभावोन्मुखी बन गई है—जिनमें से कई सुधार भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान किए गए थे। यह एक नए देश सहभागिता मॉडल को दर्शाती है जो सार्वजनिक वित्तपोषण के साथ-साथ परिणामों, निजी पूंजी एकत्रित करने और वैश्विक ज्ञान के रणनीतिक उपयोग पर बल देती है।
भारत विश्व बैंक समूह का सबसे बड़ा ग्राहक है, जिसके लिए आईबीआरडी ने 79 परियोजनाओं में 20 अरब डॉलर, आईएफसी ने 174 परियोजनाओं में 16.72 अरब डॉलर और एमआईजीए ने 618 मिलियन डॉलर की गारंटी दी है। यह नई साझेदारी आईबीआरडी के संसाधनों के उपयोग को निजी क्षेत्र की पूंजी के लाभ उठाने की दिशा में और आगे बढ़ाएगी, साथ ही विश्व बैंक समूह की निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और साधनों का अधिक से अधिक उपयोग करेगी।