वाशिंगटन, 15 जनवरी, 2026: विश्व बैंक के कार्यपालक निदेशक बोर्ड ने आज पश्चिम बंगाल में 9 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन की गुणवत्ता और जीवन प्रत्याशा में सुधार लाने के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक व्यापक और अधिक समान पहुंच सुनिश्चित करने के कार्यक्रम के वित्तपोषण को मंजूरी दी है ।
पश्चिम बंगाल में पिछले दो दशकों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार प्रगति हुई है, जैसे कि शिशु मृत्यु दर वर्ष 2010-2012 में प्रति 1,000 जीवित शिशु जन्मों पर 32 मौतों से घटकर वर्ष 2018-2020 में 19 रह गई है। वर्ष 2019 तक कुल प्रजनन दर प्रति महिला 1.64 जन्म है, जो देश में सबसे कम दरों में से एक है । परिणामस्वरूप, पश्चिम बंगाल में जीवन प्रत्याशा 72 वर्ष है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। हालांकि, इन उपलब्धियों और किशोरियों में उच्च साक्षरता दर (89 प्रतिशत) के बावजूद, पश्चिम बंगाल में भारत में किशोर गर्भावस्था की दूसरी सबसे उच्च दर 16 प्रतिशत है, जो वर्ष 2018-2020 में प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 103 मौतों के मातृ मृत्यु अनुपात को भी बढ़ाती है। पुरुलिया, बीरभूम, मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिले प्रजनन, मातृ और किशोर देखभाल में गंभीर चुनौतियों का सामना करते हैं।
विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने कहा, “यह कार्यक्रम पश्चिम बंगाल को अधिक समान और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में मदद करेगा, जिससे महिलाओं, किशोरों और गैर-संक्रामक रोगों से पीड़ित लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त होगी । उन्होंने आगे कहा कि वित्तपोषण को अच्छे परिणामों से जोड़कर और शासन तथा जलवायु अनुकूलता को मजबूत करके, यह अभियान उन सेवा अंतरालों और प्रणालीगत बाधाओं को दूर करता है जिन्होंने कमजोर समुदायों के स्वास्थ्य लाभों को बाधित किया है। इसका सीधा प्रभाव अच्छे रोजगार पाने की क्षमता पर पड़ेगा।"
पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य प्रणाली सुधार कार्यक्रम संचालन (286 मिलियन डॉलर) राज्य भर में 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में सहायता करेगा, जिसमें उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों (एनसीडी) के लिए डिजिटल ट्रैकिंग उपाय शामिल हैं। इससे राज्य की स्वास्थ्य प्रणालियों में रोगी-केंद्रित देखभाल का दृष्टिकोण भी आएगा, स्वास्थ्य परिणामों के मापन में सुधार होगा और भीषण मौसम की घटनाओं के प्रति स्वास्थ्य सुविधाओं की सहनशीलता को बढ़ावा मिलेगा।यह कार्यक्रम जेंडर आधारित हिंसा (जीबीवी) सेवाओं को मजबूत करने में भी सहायता प्रदान करेगा, जिसमें लड़कों, विवाहित किशोरों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए लक्षित हस्तक्षेप शामिल हैं। पुरुलिया, बीरभूम, मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर के पांच जिलों में, यह कार्यक्रम गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार करेगा और मातृ एवं किशोर स्वास्थ्य में असमानताओं को कम करेगा।
कार्यक्रम के टास्क टीम लीडर राहुल पांडे और मेघना शर्मा ने कहा कि “उच्च रक्तचाप और मधुमेह को नियंत्रित करने जैसे उपायों के माध्यम से प्राथमिक स्तर पर निरंतर देखभाल को मजबूत करना गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के प्रसार को रोकने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है,” उन्होंने आगे कहा कि "स्वास्थ्य संबंधी परिणामों में सुधार लाने और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में विश्वास बढ़ाने के लिए कार्यक्रम का गुणवत्तापूर्ण देखभाल संबंधी हस्तक्षेपों और जेंडर आधारित हिंसा का जवाब देने के तंत्रों पर ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है।"
अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) से लिए गए 286 मिलियन डॉलर के ऋण की अंतिम परिपक्वता अवधि 16.5 वर्ष है, जिसमें तीन वर्ष की छूट अवधि भी शामिल है।