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फोटो क्रेडिट: एडोब स्टॉक

नई दिल्ली, 11 दिसंबर, 2025 – विश्व बैंक के कार्यपलक निदेशक बोर्ड ने आज उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों में दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के वित्तपोषण को मंजूरी दी है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य 27 करोड़ लोगों के लिए वायु गुणवत्ता में सुधार करना है, जिससे स्वच्छ वायु का लाभ अन्य राज्यों को भी मिलेगा। इन कार्यक्रमों का लक्ष्य इन दोनों राज्यों को व्यापारिक गंतव्य और रोजगार सृजन के केंद्र के रूप में और अधिक आकर्षक बनाना भी है।

विश्व बैंक के भारत में कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने कहा कि “दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं, उत्पादकता में कमी और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बन रहा है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश में ये अभियान भारत में राज्य सरकारों द्वारा वायु प्रदूषण को कम करने की जटिल चुनौती से निपटने के लिए शुरू किए गए पहले वायुक्षेत्र-आधारित, बहु-क्षेत्रीय कार्यक्रम हैं। ये कार्यक्रम यह भी प्रदर्शित करेंगे कि वायु गुणवत्ता सुधार पहल किस प्रकार उत्पादकता बढ़ा सकती हैं और विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए हरित रोजगार सृजित कर सकती हैं।”

उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम (यूपीकैंप) (299.66 मिलियन डॉलर) उत्तर प्रदेश सरकार की स्वच्छ वायु योजना को आगे बढ़ाते हुए परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश करेगा ताकि लोगों के लिए वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके। यह कार्यक्रम 39 लाख परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद करेगा। साथ ही, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर शहरों में 15,000 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और 500 इलेक्ट्रिक बसें शुरू करके लोगों को स्वच्छ परिवहन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार की उन योजनाओं का समर्थन करेगी जिनके तहत 13,500 प्रदूषणकारी भारी वाहनों को कम उत्सर्जन वाले वाहनों में बदलने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।

यूपीकैंप की टास्क टीम लीडर एना लुइसा लीमा और फराह ज़ाहिर ने कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार, शहर-स्तरीय समाधानों के बजाय वायु प्रदूषण नियंत्रण के समग्र दृष्टिकोण को अपनाकर, सीमा पार उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए अन्य राज्यों के साथ सहयोग करते हुए, वायु प्रदूषण को तेजी से तथा कम लागत में कम करने का लक्ष्य रखती है।” उन्होंरने आगे कहा कि “इस कार्यक्रम की पहलों में किसानों को उर्वरक उपयोग दक्षता में सुधार और पशुधन अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बेहतर प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। यह लघु एवं मध्यम उद्यमों को स्वच्छ प्रौद्योगिकियों की ओर बढ़ने में मदद करेगा और शहरी केंद्रों में ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देगा।”

हरियाणा स्वच्छ वायु परियोजना (300 मिलियन डॉलर) हरियाणा सरकार की उस कार्य योजना का समर्थन करेगी जिसका उद्देश्य बहुक्षेत्रीय हस्तक्षेपों के संयोजन के माध्यम से वायु प्रदूषण को कम करना है। यह परियोजना वायु गुणवत्ता और उत्सर्जन निगरानी प्रणालियों में निवेश करेगी ताकि राज्य विभिन्न प्रदूषण स्रोतों के प्रभाव का बेहतर आकलन कर सके। यह परियोजना गुरुग्राम, सोनीपत और फरीदाबाद शहरों में इलेक्ट्रिक बस सेवाओं और इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स जैसी स्वच्छ परिवहन सेवाओं में निवेश का भी समर्थन करेगी। इससे निर्बाध कनेक्टिविटी और रोजगार के अधिक अवसर, विशेष रूप से महिलाओं के लिए मिलेंगे। यह परियोजना राज्य के लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) द्वारा स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाने, कृषि अपशिष्ट प्रबंधन के लिए मशीनरी और प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने और धान के अवशेषों के उत्पादक पुन: उपयोग के प्रयासों का भी समर्थन करेगी।

परियोजना की टास्क टीम लीडर शार्लीन चिचगर, लघु पाराशर और सौम्या श्रीवास्तव ने कहा कि “स्वच्छ हवा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए, हरियाणा ने समन्वय, कार्यान्वयन और संबंधित एजेंसियों की निगरानी को सुगम बनाने के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (स्पेशल पर्पस व्हीकल) 'अर्जुन' की स्थापना करके एक दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाया है।” उन्होंएने आगे कहा कि “परिवहन, कृषि, उद्योग और शहरी विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उत्सर्जन को लक्षित करके, यह कार्यक्रम निजी पूंजी जुटाने के माध्यम से 127 मिलियन डॉलर से अधिक राशि जुटाने का भी लक्ष्य रखेगा।”

ये दोनों कार्यक्रम विश्व बैंक के क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम - इंडो-गंगा मैदानों और हिमालय की तलहटी (IGP-HF) का हिस्सा हैं, जो वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण का एक प्रमुख केंद्र है। इन कार्यक्रमों को विश्व बैंक के रेजिलिएंट एशिया कार्यक्रम (जिसे यूनाइटेड किंगडम के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय और स्विस सरकार की विकास और सहयोग एजेंसी द्वारा वित्त पोषित किया जाता है) और बहु-दाता ऊर्जा क्षेत्र प्रबंधन मूल्यांकन कार्यक्रम से भी अनुदान प्राप्त होगा।

उत्तर प्रदेश कार्यक्रम की अंतिम परिपक्वता अवधि 10 वर्ष है जिसमें दो वर्ष की छूट अवधि शामिल है, और हरियाणा कार्यक्रम की अंतिम परिपक्वता अवधि 23.5 वर्ष है जिसमें छह वर्ष की छूट अवधि शामिल है।

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