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नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2021 – विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मंडल ने जलवायु परिवर्तन के प्रति किसानों का लचीलापन बढ़ाने और उच्च उत्पादकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्नत वाटरशेड प्रबंधन अपनाने में राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय संस्थानों की सहायता के लिए 11.5 करोड़ डॉलर का ऋण मंजूर किया है।

भारत में 58 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्राथमिक स्रोत कृषि है। पहले से ही भूमि निम्नीकरण, मिट्टी के क्षरण, पानी की कमी, जलवायु अनिश्चितताओं और कम उत्पादकता की चुनौतियों का सामना कर रहा यह क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के झटके के प्रति भी बेहद संवेदनशील है। औसत तापमान में वृद्धि फसल की उपज को प्रभावित कर सकती है, मौसमी वर्षा में परिवर्तन रोपण के मौसम को बदल सकता है और कीटों के प्रकोप को प्रेरित कर सकता है, और बार-बार चरम मौसम की घटनाओं (जैसे बाढ़ और सूखा) से खाद्य संकट हो सकतीा है। इसके अलावा, कोविड-19 से कमजोर समुदायों की आजीविका के असंगत रूप से प्रभावित होने की संभावना है।

भारत सरकार ने 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर निम्नीकृत को बेहतर करने और 2023 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध किया है। प्रभावी वाटरशेड प्रबंधन अधिक लचीलाी खाद्य प्रणाली का निर्माण करते हुए, वर्षा आधारित क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा प्रदान करने में मदद कर सकता है।

नवाचारी विकास परियोजना के माध्यम से कृषि लचीलापन के लिए वाटरशेड कायाकल्प ग्रामीण विकास मंत्रालय में भूमि संसाधन विभाग और कर्नाटक और उड़ीसा राज्यों में आधुनिक वाटरशेड प्रथाओं का प्रारंभ करने में मदद करेगा।

“कोविड-19 महामारी ने भारत में टिकाऊ और जोखिम-रहित कृषि की आवश्यकता पर जोर दिया, जो दोनों किसानों को जलवायु अनिश्चितताओं से बचाते हैं और उनकी आजीविका को मजबूती देते हैं। विश्व बैंक के कंट्री निदेशक जुनैद अहमद ने कहा कि “यद्यपि भारत में वाटरशेड विकास के लिए एक मजबूत संस्थागत संरचना पहले से मौजूद है, फिर भी इस परियोजना के माध्यम से लागू किए जाने वाले विज्ञान-आधारित, डेटा-संचालित दृष्टिकोणों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने से जलवायु परिवर्तन की स्थिति में किसानों को नए अवसर मिल सकते हैं।” उन्होंने कहा कि "परियोजना भारत सरकार को राष्ट्र और विशेष रूप से कर्नाटक एवं उड़ीसा राज्यों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, जलवायु परिवर्तन के प्रति उनके लचीलेपन का निर्माण करने में मदद करेगी।"

भारत के प्रमुख वाटरशेड कार्यक्रम, राष्ट्रीय प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) ने महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिससे 27 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं। सरकार के नए राष्ट्रीय वाटरशेड दिशानिर्देश पोषण सुरक्षा, वाटरशेड समुदाय के कल्याण और किसानों के लिए आर्थिक लाभ सहित कई प्रमुख मुद्दों का समाधान करते हैं। यह परियोजना किसानों के लिए आय-सृजन के अवसरों को बढ़ाने, कृषि में जल और भूमि संसाधनों के उपयोग में दक्षता सुधारने में मदद करने के सरकार के उद्देश्य में योगदान करेगी।

परियोजना के लिए विश्व बैंक कार्य दल के लीडर्स प्रीति कुमार, ग्रांट मिल्ने और सत्य प्रिया ने कहा कि “दुनिया के सबसे बड़े वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रमों में से एक भारत का है। बैंक पिछले दो दशकों से नए नवाचारी दृष्टिकोणों और प्रौद्योगिकियों को सफलतापूर्वक अपनाने में भारत का समर्थन कर रहा है।” उन्होंने कहा कि “रिवार्ड परियोजना व्यापक स्थानिक डेटा और प्रौद्योगिकियों, निर्णय समर्थन उपकरणों और ज्ञान के आदान-प्रदान को विकसित और लागू करके इस प्रगति को और आगे बढ़ाएगी। अच्छी प्रथाओं को स्थानांतरित करने और बढ़ाने के लिए सीखे गए सबक सभी राज्यों और अन्य देशों के साथ साझा किए जाएंगे।”

अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (आईबीआरडी) का वित्तपोषण कर्नाटक को 6 करोड़ डॉलर, उड़ीसा को $ 4.9 करोड़ डॉलर की मदद करेगा, और शेष 60 लाख डॉलर केंद्र सरकार के भूमि संसाधन विभाग के लिए होगा। यह राष्ट्रीय प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना कार्यक्रम के नए वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई) का एक सबसेट होगा, जिसका बजट 1.68 अरब डॉलर है।

दोनों राज्यों में, परियोजना समुदाय नीत, विज्ञान आधारित वाटरशेड उप-परियोजनाओं को लागू करने के लिए विभिन्न नए दृष्टिकोणों को अपनाने और उनका पैमाना बढ़ाने में सहायता करेगी, जबकि केंद्र भूमि संसाधन विभाग और राष्ट्रीय रेनफेड क्षेत्र प्राधिकरण के माध्यम से, सबकों को ठोस बनाएगा, राष्ट्रीय तकनीकी मानकों को परिष्कृत करेगा और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में ऐसे दृष्टिकोण को मुख्यधारा में लाने के लिए एक प्रक्रिया स्थापित करेगा।

अंतरराष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक से 11.5 करोड़ डॉलर के ऋण की परिपक्वता अवधि 15 वर्ष है, जिसमें 4.5 वर्ष की छूट अवधि भी शामिल है।

Contacts

निकिता मान सिंह मेहता

nmehta6@worldbank.org
नई दिल्ली में

डायना या-वाई चुंग

dchung1@worldbank.org
वाशिंगटन में

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