प्रेस विज्ञप्ति

विश्व बैंक ने कर्नाटक हेल्थ डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म प्रोजेक्ट के लिए दिए 70 मिलियन डॉलर

27 सितम्बर, 2012




वाशिंगटन, 27 सितंबर, 2012 - विश्व बैंक ने आज कर्नाटक हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म प्रोजेक्ट को 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त लोन स्वीकृत किया है। विश्व बैंक ने यह लोन खासकर पिछड़े क्षेत्रों और कमजोर तबकों के लिए राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए दिया है।

यह प्रोजेक्ट 141.83 मिलियन डॉलर के मूल कर्नाटक हेल्थ सिस्टम डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म प्रोजेक्ट की सफलता को और वृहद आयाम देगा। मूल प्रोजेक्ट स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य और केंद्र सरकारों के खर्च में सुधार और उसके लिए जरूरी क्षमता निर्माण तथा उचित व्यवस्था करके राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने में अहम योगदान देता आ रहा है। कई सारे स्वास्थ्य संकेतकों में इस प्रोजेक्ट से सुधार आया है। उदाहरण के लिए, एक स्वास्थ्य केंद्र में पैदा लेने वाले बच्चों का अनुपात 2005-06 के 65 प्रतिशत से बढ़कर 2009 में 86 प्रतिशत हो गया, पूरी तरह से

टीकाकरण करवाने वाले बच्चों का अनुपात 2005-06 के 55 प्रतिशत से बढ़कर 2009 में 78 प्रतिशत हो गया (जबकि लक्ष्य 80 प्रतिशत का था) और 96 प्रतिशत मोबाइल हेल्थ क्लीनिक काम करने लगे (लक्ष्य 97 प्रतिशत था)। प्रोजेक्ट के द्वारा 2011 में किए गए एक स्वास्थ्य केंद्र संबंधी सर्वे के अनुसार, 83 प्रतिशत सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में सर्वे के समय एक डॉक्टर था, जबकि 2004 में यह प्रतिशत महज 35 था और 2011 में 89 प्रतिशत पीएचसी में एक कार्यरत लेबर रूम था, जबकि 2004 में यह प्रतिशत महज 67 था। आज राज्य के 1000 से अधिक पीएचसी चौबीसों घंटे काम करते हैं।

इस प्रोजेक्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों को बहाल करने और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बेहतरी लाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस प्रोजेक्ट ने गरीबों के लिए हॉस्पिटल सेवाएं खरीदकर स्वास्थ्य वित्त पोषण संबंधी राज्य सरकार की पहल में भी अहम योगदान दिया है। इन सेवाओं से अभी तक कुल मिलाकर 19,000 मरीज लाभान्वित हुए हैं, अन्यथा इन सेवाओं का फायदा लेने के लिए उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आज स्वीकृत होने वाला यह अतिरिक्त वित्त पोषण, प्राथमिक और मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने, इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने, सरकारी- निजी करार को अंजाम देने और गरीबों के लिए हॉस्पिटल सेवाओं की खरीद में राज्य सरकार की रणनीति को अहम सहयोग देगा। यह प्रोजेक्ट गैर संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और सड़क सुरक्षा से संबंधित नयी रणनीतियों में भी मददगार होगा।

भारत में विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ओन्नो रुह्ल ने इस संबंध में कहा, "पिछले दो दशकों से कर्नाटक ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी सुधार किए हैं। इसके बावजूद बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के उपयोग के मामले में सामाजिक-आर्थिक अंतर अभी भी बने हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि यह प्रोजेक्ट मां और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की सरकार की कोशिशों में, खासकर गरीबों और कमजोर तबकों को स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने में लगातार अपना योगदान देता रहेगा।" उन्होंने आगे कहा, "विश्व बैंक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कर्नाटक सरकार के साथ लगातार और बेहद उत्पादक साझेदारी बनाए रखना चाहता है। इन अनुभवों और मॉडल का लाभ भारत के अन्य राज्यों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिलेगा।

इस प्रोजेक्ट का मुख्य फोकस राज्य सरकार की वर्तमान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर है। इसमें मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाना, 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए 57 अन्य पीएचसी को सहायता देना, ठेके पर गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा संचालित मोबाइल हेल्थ क्लीनिक के जरिए कमजोर समुदायों और गरीब मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, एनजीओ द्वारा संचालित हॉस्पिटल हेल्प डेस्क को गरीबों के लिए हॉस्पिटल सेवाओं में सुधार करने में मदद करना, गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली रणनीतियां बनाने में मदद करना और स्वास्थ्य प्रशासन की क्षमताओं में विस्तार करने में मदद करना आदि शामिल हैं। गरीब मरीजों के लिए हॉस्पिटल सेवाओं की खरीद के लिए राज्य सरकार के कार्यक्रम को यह प्रोजेक्ट लगातार अपनी सहायता देता रहेगा। इस मामले में यह प्रोजेक्‍ट स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और क्षमता निर्माण करने में मददगार की भूमिका निभाएगा।

 भारत में उभर रही नयी स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए कई सारी नयी रणनीतियों को इस प्रोजेक्ट के सहयोग से अमलीजामा दिया जाएगा। इसमें गैर संक्रमणकारी बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक कार्यक्रम भी शामिल होगा, जिसमें कमजोर तबकों तक से सम्पर्क स्थापित करना, बीमारियों की पहचान और उसके लिए जरूरी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों पर फोकस करना शामिल हैं, जो भारत के गरीबों पर लगातार बोझ डालती जा रही हैं। इससे जुड़े पायलट प्रोजेक्ट में खास तौर पर सर्विकल कैंसर की रोकथाम पर ध्यान दिया जाएगा, जिसकी पूरी तरह से चिकित्सा हो सकती है। लेकिन इसके कारण राज्य की हजारों महिलाएं मौत के गाल में जा रही हैं। विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित एक अन्य प्रोजेक्ट-द सेकंड कर्नाटक स्टेट हाईवेज इम्प्रुवमेंट प्रोजेक्ट के करीबी सहयोग से अतिरिक्त वित्त पोषण एक व्यापक सड़क सुरक्षा रणनीति को भी मदद मिलेगी। इससे सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को बेहतर एम्बुलेंस और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी बल दिया जाएगा।

विश्व बैंक के वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ और प्रोजेक्ट की टास्क टीम के प्रमुख पैट्रिक मुलेन ने कहा, "2006 में अपनी शुरुआत से ही यह प्रोजेक्ट हमेशा कर्नाटक के स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार और नवीन तरीकों के उपयोग को समर्थन देने पर फोकस किया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार के खर्च में इजाफा होने पर यह प्रोजेक्ट विश्व बैंक के साथ तकनीकी सहयोग और उसके फायदे से जुड़ी गतिविधियों पर अधिक फोकस करेगा। यह प्रोजेक्ट उन पायलट प्रोजेक्ट पर भी काम करेगा, जिन्हें अगर सफलतापूर्वक अंजाम देना संभव हुआ, तो सरकारी कोष के इस्तेमाल से उन्हें और अधिक बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही इस तरह के निर्णय की जानकारी देने का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

 इस प्रोजेक्ट का वित्त पोषण विश्व बैंक की किफायती ऋण देने वाली इकाई -इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) के क्रेडिट से किया जाएगा। यह इकाई 25 साल की मैच्योरिटी वाला ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराएगी। लोन अदायगी के मामले में पांच साल का ग्रेस पीरिएड भी होगा, यानी लोन देने की अवधि पांच साल और बढ़ाई जा सकती है।

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प्रेस विज्ञप्ति नं:
2012/089/SAR

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